Giridih : जिस लड़की से जीतन शादी करने की ठान रखा था, वह लड़की टीचर अशोक की मंगेतर बन चुकी थी। इसी महीने अशोक की शादी इसी लड़की से होनी थी। जीतन किसी भी हालत में इस लड़की को हासिल करना चाहता था, तब उसने भयानक प्लानिंग बना ली और टीचर अशोक को जेल भिजवाने की भरपूर कोशिश में अपनी ताकत झोंक दी। भला हो गिरिडीह के पुलिस कप्तान डॉ विमल कुमार का, जिनकी पारखी नजर में जीतन खुद के बुने जाल में ही फंस गया। निर्दोष टीचर अशोक जेल जाने से बच गया। तय प्लानिंग के अनुसार जीतन ने 25 हजार रुपये में डब्लू कुमार दास से पिस्टल और गोलियां खरीदी। हथियार और गोलियां टीचर अशोक के भाई की गुमटी के नीचे रख दिया और कुछ गोली अशोक के घर के बाहर मिट्टी के बोरे में छुपा रख दिया। इसके बाद जीतन खुद पुलिस को फोन कर बता दिया कि अशोक और उसके भाई ने हथियार गोली छुपा रखे हैं। खबर पक्की निकली। हथियार और गोलियां के साथ पुलिस टीचर अशोक दास और उसके भाई को उठा ले गई। जांच से खुलासा हुआ कि यह सब साजिश अशोक और उसके भाई को फंसा कर जेल भेजने के लिये रची गई थी।
पुलिस कप्तान डॉ विमल कुमार ने पूरे मामले की तहकीकात के लिये SDPO जीतवाहन उरांव के नेतृत्व में एक स्पेशल टीम बनाई। गठित टीम ने सबसे पहले जीतन दास को उठा लिया। पूछताछ में वह टूट गया और अपना सारा गुनाह कबूल कर लिया। जीतन की निशानदेही पर हथियार सप्लायर डब्लू कुमार दास और मनोज चौधरी भी धरा गये।








