Hazaribagh : हज़ारीबाग के एक छोटे से गांव बंडखड़ी का होनहार बेटा… जो रोज़ी-रोटी की तलाश में सऊदी अरब की तपती जमीन पर पहुंचा था। परिवार के सपनों को अपने मजबूत कंधों पर लेकर निकला था। लेकिन किसे पता था कि 29 साल की उम्र में ही, 24 मई 2025 की वो सुबह उसकी ज़िंदगी की आखिरी सुबह बन जायेगी। वो L&T कंपनी में काम करता था, लेकिन एक अचानक हुये हादसे ने उसका जीवन छीन लिया।
पर कहानी यहीं नहीं थमी…जब खबर गांव पहुंची, तो मातम पसरा। लेकिन इसी गम की घड़ी में सरकार ने दिखाई संवेदनशीलता और संजीदगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पहल और राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष की तत्परता से धनंजय का पार्थिव शरीर तबूक (सऊदी अरब) से उसके पैतृक गांव तक सकुशल लाया गया। सरकार ने यही नहीं, बल्कि परिजनों को मुआवज़ा दिलवाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है ताकि कम से कम उनके जीवन की जद्दोजहद थोड़ी आसान हो सके।






