Ormanjhi(Kuldeep/Amitabh) : ”खून-पसीना बहाकर फूलगोभी और पत्तागोभी की खेती करने वाले किसान खून के आंसू रो रहे हैं। ये दोनों हरी ताजी सब्जियां 2-3 रुपये किलो तक भी नहीं बिक रहा। हालत इतनी खराब है कि दुखी किसान अपने खेतों में ट्रैक्टर चलवा दिये। इस किसान का कहना है कि तोड़ाई से लेकर इसे बाजार तक ले जाने में जितना खर्च होगा, उतनी कमाई भी नहीं होगी। इससे बेहतर इसे यहीं रौंद देना।” यह कहना है दुखी किसान कामेश्वर महतो का। राजधानी से सटे ओरमांझी के उकरीद गांव में रहनेवाले किसान कामेश्वर महतो ने कहा कि 6 एकड़ जमीन लीज पर लेकर उसमें दिन-रात मेहनत कर फूलगोभी और पत्तागोभी उगाये। हरी और ताजी सब्जियां तो तैयार हो गई, पर उसकी कीमत नहीं मिली। इसका दुख अंदर ही अंदर खाये जा रहा। किसान का कहना है कि अगर ओरमांझी में भी एक डेली मार्केट होता तो शायद किसानों का भला होता। सप्ताह में एक रोज बाजार लगने से यहां किसानों का भला नहीं होने वाला। व्यापारी भी यहां नहीं आते। कोहरामलाइव के सीनियर रिपोर्टर कुलदीप तिवारी एवं अमिताभ ने किसान से बातें की, सुनें क्या बोल गये किसान कामेश्वर महतो…
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