Kohramlive : हिंदू धर्म में मां सरस्वती को ज्ञान, वाणी और बुद्धि की देवी माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है, “वाणी ही भाग्य का द्वार है”, क्योंकि जो हम बोलते हैं, वही हमारे जीवन की दिशा तय करता है। बुज़ुर्ग अक्सर कहते हैं, “हमेशा शुभ बोलो, क्या पता कब जीभ पर मां सरस्वती बैठी हों”। दरअसल, यह केवल कहावत नहीं, बल्कि गहरी आध्यात्मिक सच्चाई है।
कब विराजती हैं मां सरस्वती हमारी वाणी पर?
मान्यता है कि मां सरस्वती दिन में एक बार हर व्यक्ति की जीभ पर आती हैं और वह समय होता है ब्रह्म मुहूर्त का।
यह मुहूर्त सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटे पहले, यानी प्रातः 3.30 से 5.30 बजे के बीच होता है। इस समय प्रकृति सबसे शांत होती है, वातावरण में दिव्य ऊर्जा होती है और मन शुद्ध रहता है। कहा जाता है कि इस समय बोले गये शब्दों में सत्य की शक्ति होती है, वे जीवन में साकार रूप ले लेते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त में बोलें सिर्फ शुभ और सकारात्मक बातें
शास्त्रों में उल्लेख है कि ब्रह्म मुहूर्त के समय वाणी में देवी का वास होता है। इस दौरान यदि हम अच्छा सोचते और बोलते हैं, तो जीवन में शुभता और सफलता का आगमन होता है। लेकिन यदि इस घड़ी में क्रोध, नकारात्मकता या बुरे विचार मन में लाते हैं, तो उसका प्रतिकूल प्रभाव हमारे कर्मफल पर पड़ता है। इसलिये इस समय अपने विचारों, भावनाओं और वाणी पर संयम रखना अत्यंत आवश्यक माना गया है।
ब्रह्म मुहूर्त में करें ये तीन कार्य
- भगवान का स्मरण करेंः सुबह आंखें खुलते ही ईश्वर या अपने आराध्य देव का ध्यान करें। यह दिनभर के लिये शुभ ऊर्जा देता है।
- मेडिटेशन और साधना करेंः इस समय मन शांत और स्थिर रहता है, इसलिये ध्यान और साधना से आत्मबल बढ़ता है।
- मंत्र जाप या प्रार्थना करेंः कहा गया है कि ब्रह्म मुहूर्त में किया गया जाप सौ गुना फलदायी होता है।
ब्रह्म मुहूर्त केवल जागने का समय नहीं, बल्कि ईश्वर-संपर्क का क्षण है, जब मां सरस्वती स्वयं आपकी वाणी पर विराजती हैं। इसलिए हर दिन की शुरुआत शुभ विचारों और मधुर वाणी से करें, क्योंकि बोले गये शब्द कभी व्यर्थ नहीं जाते, वे ही आपका भविष्य रचते हैं।
Disclaimer: यह लेख शास्त्रों और लोकमान्यताओं पर आधारित है। Kohramlive.com इसकी पुष्टि नहीं करता है।




