Bihar : बिहार विधानसभा में ध्वनि मत से चार अहम संशोधन विधेयक पारित हुये। इन फैसलों को लेकर कहा जा रहा है कि अब नौकरी भी मेरिट से मिलेगी और निकायों में भी लोकतंत्र की असली धड़कन सुनाई देगी। अब तक कई बोर्ड और निगम अपने स्तर पर नियुक्तियां कर लेते थे और अक्सर सवाल उठते थे कि चयन में पारदर्शिता कहां है? अब सरकार ने इस धुंध को साफ करने का फैसला कर लिया है। ग्रुप-B और C पदों पर भर्ती अब बिहार तकनीकी सेवा आयोग के माध्यम से होगी। ग्रुप-D पदों के लिये बिहार कर्मचारी चयन आयोग परीक्षा आयोजित करेगा। इससे भर्ती प्रक्रिया केंद्रीकृत, पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगी। संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि अब मेधावी युवाओं को उनका हक मिलेगा, बिना किसी सिफारिश और बिना किसी शोर-शराबे के। यह सुनकर उन लाखों युवाओं की आंखों में उम्मीद चमक उठी, जो वर्षों से तैयारी की आग में तप रहे हैं। वहीं, नगर निकायों में अब अध्यक्ष की मनमानी नहीं चलेगी। पहले स्थायी समितियों के सदस्य सिर्फ नामांकन से बन जाते थे, लेकिन अब सदस्यों के बीच से लोकतांत्रिक चुनाव होगा। यानी अब कुर्सी नहीं, काबिलियत तय करेगी कि जिम्मेदारी किसे मिलेगी। वहीं, भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी। मेधावी युवाओं को सीधा अवसर मिलेगा।नगर निकायों में जवाबदेही बढ़ेगी। प्रशासनिक व्यवस्था आधुनिक और तेज होगी।
अंग्रेजों के दौर का नाम भी बदला
एक और ऐतिहासिक बदलाव हुआ। ब्रिटिश काल से चले आ रहे “बिहार, उड़ीसा, बंगाल और असम सिविल न्यायालय” का नाम बदलकर अब सिर्फ बिहार सिविल न्यायालय कर दिया गया है।






