गढ़वा : इंसान अपने मालिक को भूल जाता है, मगर जानवर अपने मालिक को नहीं भूलता और अपनी वफादारी निभाता है। ऐसा ही एक मामला गढ़वा से सामने आया है, जहां एक घोड़े के 4 दावेदार सामने आ गए। घोड़े के असली मालिक की पहचान करने के लिए पंचायत बुलाई गई। पंचायत में बैठक हुई लोग यह तय नहीं कर पा रहे थे कि घोड़े का असली मालिक कौन है। फिर लोगों ने फैसला घोड़े पर ही छोड़ दिया और घोड़े ने अपने असली मालिक को पहचान लिया।
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गढ़वा जिले के डंडई प्रखंड के सूअरजंघा गांव निवासी मंगल भुईयां को 2 महीने पहले जंगल में एक घोड़ा मिला था। वह कहीं से भटक कर आ गया था। मंगल उसे पकड़ कर अपने घर ले आया। गांव में उसने लोगों को बताया कि यह घोड़ा उसने खरीद कर लाया है। ग्रामीणों ने भी उसकी बात मान ली। अब मंगल घोड़े की देखरेख करने लगा और उसका एक नया नाम भी रख दिया तूफान।
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कुछ दिन बाद दो अनजान लोग सूअरजंघा गांव पहुंचे और घोड़े पर अपनी दावेदारी कर दी। दोनों ने अपना नाम अमानत अंसारी और सादिक अंसारी बताया। दोनों ने खुद को मेराल का निवासी और घोड़े का व्यापारी बताया। उसने बताया कि पता चला कि इस गांव में एक घोड़ा आ गया है। जब मंगल को इस बात की जानकारी हुई तो उसने इसका विरोध किया और दोनों को बंधक बना लिया। हो-हंगामे के बाद गांव में पंचायत बुलाई गई, जिसमें एक और दावेदार सामने आ गया। जिले के पचौर गांव निवासी प्रहलाद साव ने घोड़े को अपना बताया और उस पर दावेदारी की। पंचों के लिए यह तय करना मुश्किल हो गया कि घोड़ा आखिर है तो किसका। पंचों ने अब फैसला घोड़े पर छोड़ दिया। चारों दावेदार को एक-एक कर घोड़े के पास भेजा गया। सबसे बाद में गए प्रहलाद साव को पास आते देख घोड़ा उनसे लिपट गया और अपनी वफादारी का परिचय देने लगा, जिससे यह तय हो गया कि घोड़ा उन्हीं का है और पंचों ने घोड़ा उन्हें सौंप दिया। झूठ बोलने के लिए मंगल को फटकार लगाई गई।
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