Saraikela : झारखंड के सरायकेला-खरसावां की एक गर्म दोपहरी में, एक घर की दीवारों ने वो खामोश चीखें सुनीं, जो बाहर की दुनिया तब सुन सकी, जब बदबू ने पर्दा हटाया। गिरिडीह का राजेश कुमार चौधरी एक सीधा-सादा लैब टेक्नीशियन, जिसने महज चार दिन पहले अपनी पत्नी और बच्चों संग नया किराये का मकान बसाया था। लेकिन वो क्या जानता था कि यह मकान उसके लिए मौत की चौखट बन जायेगा।
अफवाहें थीं… मोहल्ले में बातें थीं… कि पति-पत्नी के बीच रोज के झगड़े अब लड़ाई से आगे कुछ और बनते जा रहे थे। 17 जुलाई की शाम राजेश आख़िरी बार दिखा, पनीर लेते हुए, मुस्कराते हुए… यह कहते हुए कि उसका साला आया है। उसके बाद न कोई आवाज आई, न कोई साया। जब पड़ोसियों ने शनिवार को घर से उठती सड़ांध की गवाही दी, तब पुलिस ने दरवाज़ा खोला और अंदर था खून से लथपथ सच…राजेश की लाश। गर्दन कटी हुई, शरीर अधजला। पत्नी बच्चों को लेकर फरार थी… और पीछे रह गया था एक ऐसा खामोश सवाल, जिसकी गूंज अब पूरे शहर में सुनाई दे रही है।
पुलिस की जांच जारी है, लेकिन मोहल्ले की आंखों में अब भी डर है क्योंकि जो हत्या प्रेम और शक के बीच में हुई, वो किसी भी रिश्ते का सच हो सकती है।












