- आय में बढ़ोतरी से खुश किसानों ने की प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत योजना की सराहना
पाकुड़ : झारखंड में पाकुड़ की सब्जियों की डिमांड अब फॉरेन यानी विदेश में भी होने लगी है। यह यहां के किसानों की मेहनत का परिणाम है। जिला प्रशासन से मिले सहयोग के बाद यहां की खेती इतनी उन्नत हो गई है कि इसकी पूछ विदेश तक पहुंच गई है। बैगन, भिंडी, बरबट्टी, ब्रोकली के बाद अब कच्चू भी विदेशों में पसंदीदा बन रहा है। यहां उपजाए गए कच्चू कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विभाग प्राधिकरण के सहयोग से कतर भेजे जा रहे हैं। दो मीट्रिक टन कच्चू की पहली खेप कोलकाता के रास्ते विदेश भेजी जा रही है। इसे डीसी वरूण रंजन ने हरी झंडी दिखाई है। आय में बढ़ोतरी से खुश किसानों ने प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत योजना की सराहना की है।
सब्जियों की Foreign में बढ़ी डिमांड: हर स्तर पर सहयोग करेगा जिला प्रशासन
पाकुड़ जिले का कच्चू विदेश भेजे जाने के मामले में डीसी वरुण रंजन ने बताया कि जिले के किसानों के सामने बाजार की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती है। जिला प्रशासन एपीडा के सहयोग से इस समस्या से निपटेगा। चास हाट योजना के तहत जिले के लक्षित 8 हजार किसानों के उत्पादित सामान को भी विदेशी बाजार के मापदंड के अनुरूप तैयार कर उसे विदेशों में भेजने का काम प्रशासन करेगा।
ब्लड प्रेशर, मधुमेहऔर कैंसर में भी उपयोगी
बता दें कि बिहार, झारखंड और बंगाल में कच्चू के नाम से मशहूर इस सब्जी को देश के दूसरे इलाके में अरबी या घुइयां के नाम से भी जाना जाता है। सोडियम की अच्छी मात्रा पाए जाने के कारण ब्लड प्रेशर, मधुमेहऔर कैंसर जैसी बीमारियों में इस सब्जी को उपयोगी माना जाता है।
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