RANCHI : अर्जुन महापात्रा अब खुश हैं। उन्हें आमदनी का सशक्त माध्यम मिल गया। पश्चिमी सिंहभूम के सोनुवा प्रखंड स्थित बांसकाटा गांव निवासी अर्जुन कुछ वर्ष पूर्व तक जलाशय निर्माण में जमीन जाने के बाद से बेरोजगार थे। एक दुकान का संचालन कर अपना भरण पोषण कर रहे थे। इतनी आमदनी नहीं थी कि खुशहाल जीवन यापन कर सके। इनके जीवन में मछली पालन के लिए केज पद्धति वरदान बन कर आया। महापात्रा शिक्षित बेरोजगार थे। इस वजह से चाईबासा डीसी के सहयोग से मत्स्य पालन के लिए पनसुवा में समिति का गठन किया। देखते ही देखते इस समिति में अन्य लोग भी जुड़े और कारवां बनता गया। अर्जुन जैसे दर्जनों लोगों ने मत्स्य पालन को अपनी आजीविका का आधार बनाया और आज आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो गए हैं।
रोजगार सृजन पर भी है ध्यान
पश्चिम सिंहभूम स्थित विभिन्न जलाशयों में अब तक 69 केज बैटरी मौजूद है, जिसमें से 53 केज बैटरी ब्लू रिवॉल्यूशन योजना तथा 16 केज बैटरी जलाशय मत्स्य विकास योजना के तहत जिले को उपलब्ध कराया गया है। जिले में तीन मोटर बोट भी जलाशय मत्स्य विकास योजना के तहत संचालित है। अभी वर्तमान में जिले के पनसुवा डैम मे दो और नकटी डैम में एक मोटर बोट के माध्यम से पर्यटन के क्षेत्र में वहां के ग्रामीणों के बीच रोजगार सृजन किया जा रहा है। “जलाशयों के आसपास रहने वाले एवं विस्थापित परिवारों को आय का सशक्त माध्यम उनके गांव में ही उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसके माध्यम से रोजगार सृजन भी करना है। वर्तमान में मत्स्य पालकों को हर संभव सुविधा प्रदान करने का प्रयास सरकार के निर्देश पर किया जा रहा है।”
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