Bihar : बिहार का पहला गुरुकुलम बक्सर से शुरू करने की तैयारी है। शिक्षा विभाग के प्रस्ताव के मुताबिक यहां बच्चों को पहली कक्षा से इंटर तक एक ही परिसर में वेद, कर्मकांड, विज्ञान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की शिक्षा दी जायेगी। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के हवाले से मीडिया में आई खबर के मुताबिक गुरुकुलम की स्थापना से जुड़े प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिये भेजने की तैयारी है। गुरुकुलम के लिये बक्सर सदर क्षेत्र में करीब पांच एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई है। शिक्षा विभाग ने जिला प्रशासन को परियोजना का प्रस्ताव तैयार करने के लिये पत्र भी भेजा है। योजना पारंपरिक गुरुकुल की तर्ज पर इसे आवासीय परिसर के रूप में विकसित करने की है। यानी बच्चे सिर्फ घंटी बजने पर कक्षा में पहुंचकर पढ़ाई नहीं करेंगे, बल्कि उसी परिसर में रहेंगे, सीखेंगे और सामूहिक जीवन का अनुभव भी हासिल करेंगे।
गरीब बच्चों के लिये पढ़ाई, भोजन और रहना मुफ्त
इस गुरुकुलम की सबसे खास बात होगी पूरी तरह नि:शुल्क आवासीय शिक्षा। कम आय वाले परिवारों से आने वाले बच्चों को नामांकन में प्राथमिकता देने की योजना है। बच्चों के रहने, भोजन और आवास की व्यवस्था परिसर में ही होगी। वहीं, शिक्षकों के लिये भी परिसर में आवास की व्यवस्था प्रस्तावित है। यानी शिक्षक और विद्यार्थी एक ही शैक्षणिक वातावरण में रहेंगे, कुछ वैसा ही, जैसा पुराने गुरुकुलों की कल्पना में हुआ करता था। गुरुकुलम के लिये शिक्षकों की व्यवस्था दक्षिण भारत के संस्थानों से करने की योजना है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के अनुसार, कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य ने शिक्षक उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। बेंगलुरु स्थित सत्य साईं संस्था ने भी अपने शिक्षकों को भेजने की इच्छा जताई है। मंत्री का कहना है कि सरकार का उद्देश्य प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा और तकनीकी कौशल के साथ एक ही मंच पर लाना है। प्रस्तावित गुरुकुलम में एक कक्षा के दो सेक्शन होंगे। प्रत्येक सेक्शन में 30 विद्यार्थी रखने की योजना है। पढ़ाई का दायरा भी खासा दिलचस्प होगा, वेद और कर्मकांड, विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हिंदी साहित्य, अंग्रेजी साहित्य, संस्कृत और भारतीय संस्कृति। यानी सुबह वेदों की ऋचाएं और भारतीय ज्ञान परंपरा, तो बदलती दुनिया के साथ कदम मिलाने के लिये विज्ञान और AI की पढ़ाई, दोनों साथ-साथ। गुरुकुलम का मकसद केवल परीक्षा पास कराने तक सीमित नहीं रखा जायेगा। आवासीय वातावरण में बच्चों के व्यक्तित्व विकास, अनुशासन, जीवन कौशल और सामूहिक जीवन पर भी जोर देने की योजना है। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे बच्चों को अपनी संस्कृति और परंपराओं की समझ के साथ आधुनिक दुनिया की जरूरतों के मुताबिक तकनीकी कौशल भी मिल सकेगा।
इंटर के बाद भी खुला रहेगा आगे बढ़ने का रास्ता
गुरुकुलम की योजना फिलहाल पहली कक्षा से इंटर तक की शिक्षा देने की है, लेकिन आगे स्नातक स्तर तक पढ़ाई जारी रखने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। इसके लिये दिल्ली स्थित लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विश्वविद्यालय से बातचीत की गई है। इससे विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा की ओर बढ़ने का रास्ता भी मिल सकता है। बिहार में AI और तकनीकी शिक्षा को स्कूल स्तर तक पहुंचाने की दिशा में पहले से प्रयास हो रहे हैं। अब गुरुकुलम के जरिये उसी तकनीकी शिक्षा को भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ जोड़ने की कोशिश है। अगर बक्सर का यह प्रयोग सफल रहा, तो आने वाले दिनों में गुरुकुलम का यह मॉडल बिहार के दूसरे हिस्सों तक भी पहुंच सकता है।








