Kohramlive : काठमांडू की गलियों से लेकर संसद की सीढ़ियों तक, नेपाल ने बीते हफ्ते वो मंजर देखा जिसने पूरे उपमहाद्वीप को हिला दिया। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के फैसले के खिलाफ उठी युवाओं की आवाज इतनी बुलंद हुई कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली समेत कई मंत्रियों को कुर्सी छोड़नी पड़ी। संसद, सुप्रीम कोर्ट और नेताओं के घर जलते रहे, जबकि सड़कों पर ‘जेन जी’ पीढ़ी बदलाव की हुंकार भरती रही। लेकिन सवाल ये है आखिर इस आंदोलन के सूत्रधार कौन हैं? कौन से चेहरे नेपाल की सियासत का भविष्य तय करने जा रहे हैं?
सुदन गुरुंगः भूकंप से निकला जननेता
इवेंट मैनेजमेंट और नाइटलाइफ से सामाजिक सेवा की राह चुनने वाले गुरुंग ने 2015 के भूकंप में “हमि नेपाल” संस्था बनाई। कोरोना के दौर में भी राहत पहुंचाई। आंदोलन में उन्होंने छात्रों से स्कूल ड्रेस में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील की थी। लेकिन पुलिसिया लाठी-गोलियों ने उन्हें भड़का दिया और उन्होंने ओली से तत्काल इस्तीफे की मांग कर डाली।
बालेन शाहः रैपर इंजीनियर से काठमांडू मेयर
2022 में स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में मेयर बने शाह आज युवाओं की धड़कन हैं। कर्नाटक से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले बालेन शाह टाइम मैगजीन की “टॉप 100 उभरते नेताओं” में जगह बनाई। आंदोलन में फ़ेसबुक पर लिखा,“भले ही आयु सीमा के कारण शामिल नहीं हो सकता, पर पूरा दिल युवाओं के साथ है।” उनकी लोकप्रियता ओली विरोध की धुरी बनी।
रबि लमिछानेः टीवी एंकर से सियासत के धुरंधर
“सीधा कुरा जनता संग” शो से घर-घर में पहचान बनाने वाले लमिछाने ने 2022 में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) बनाई।20 सीटें जीतकर उप-प्रधानमंत्री व गृह मंत्री बने। घोटाले में गिरफ्तारी के बाद जेल गये। आंदोलन में उनकी पार्टी के 20 सांसदों ने एक साथ इस्तीफा देकर आग में घी डाला। जेल से छुड़ाये जाने के बाद वे युवाओं के और भी बड़े हीरो बन गये।
सुशीला कार्कीः पहली महिला चीफ जस्टिस से आंदोलनकारी
1952 में विराटनगर जन्मे बीएचयू, बनारस से राजनीति शास्त्र और त्रिभुवन यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई करने वाली सुशीला कार्की बल प्रयोग को “हत्या” कहकर खुद सड़कों पर उतर आईं। 2500 से अधिक युवाओं ने उनके नाम पर हस्ताक्षर कर उन्हें सत्ता सौंपने की मांग तक कर डाली।
नेपाल की अगली सुबह?
आज नेपाल की राजनीति के चौखट पर ये चार चेहरे खड़े हैं, गुरुंग युवाओं की मासूम लेकिन सख्त आवाज, बालेन शाह आधुनिकता और भ्रष्टाचार विरोध का प्रतीक, लमिछाने जनता से सीधे जुड़ा चेहरा एवं सुशीला कार्की न्यायपालिका से आईं सियासी उम्मीद।












