Delhi : लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुये धमाके ने एक पूरे परिवार की सांसें रोक दीं। बारूद की गंध के बीच उठे उस सवाल ने सबको सन्न कर दिया, क्या सचमुच डॉ. उमर नबी, वो शख्स जो बच्चों को पढ़ाता था, जो एक फैकल्टी रूम में ज्ञान की बातें करता था, वही इस मौत की गाड़ी चला रहा था? परिवार को यकीन नहीं है कि डॉ उमर नबी आतंकी हो सकता है। बीते सोमवार की शाम को हुये विस्फोट में 11 लोगों की मौत और कई घायल हो गये। यह हादसा उस वक्त हुआ जब लाल किले के पास एक ह्युंडई i20 कार अचानक धमाके के साथ फट गई। चारों ओर धुआं, खून और सन्नाटा फैल गया। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि कार चला रहा व्यक्ति कोई और नहीं, पुलवामा के कोइल गांव का रहने वाला डॉ. उमर नबी था। फरीदाबाद के एक कॉलेज में पढ़ाने वाला, सादा जीवन जीने वाला एक प्रोफेसर। कश्मीर के पुलवामा से उमर की भाभी, मुजम्मिला अख्तर मीडिया से बोलीं, “वो बचपन से शांत स्वभाव का था। हमने उसे बड़ी मुश्किल से पढ़ाया था ताकि वो हमारा सहारा बने। विश्वास नहीं होता कि वो किसी ऐसे काम में शामिल हो सकता है।” उमर ने आखिरी बार शुक्रवार को फोन किया था, कहा था, “परीक्षायें हैं, तीन दिन बाद घर लौटूंगा।” पर अब घर लौटे तो बस खबर बनकर। पुलिस ने मीडिया को बताया कि धमाके में अमोनियम नाइट्रेट, फ्यूल ऑयल और डिटोनेटर का इस्तेमाल हुआ। शंका है कि यह मामला फरीदाबाद में हाल ही में पकड़े गये आतंकी मॉड्यूल से जुड़ा हो सकता है, जहां से करीब 2,900 किलो विस्फोटक बरामद किये गये थे। अब यह केस NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) के हवाले कर दिया गया है। मामला यूएपीए और विस्फोटक अधिनियम के तहत दर्ज हुआ है।
क्लासरूम से कट्टर सोच तक का सफर?
जांच में नये खुलासे हुये हैं। फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी, जहां उमर पढ़ाता था, वहां के कुछ छात्रों के हवाले से मीडिया में खबर आई है कि वो लड़के और लड़कियों को अलग-अलग लेन में बैठाता था और क्लास में धर्म के हिसाब से दीवारें खींचता था। एक छात्रा ने कहा कि “वो अपने धर्म को लेकर बेहद प्रभावित था। हमसे कहता था कि तुम्हें दूसरों से अव्वल रहना है। नमाज के वक्त क्लास रुक जाती थी और उसके बाद ही दोबारा शुरू होती थी।” धीरे-धीरे उसके भीतर कुछ बदल रहा था एक प्रोफेसर का मन शायद कट्टरपंथ की गिरफ्त में था।



