Ranchi(Neeraj Thakur) : “बंदूक से निकली हर गोली लौटकर आती है, बस वक्त का खेल होता है कि किसे कब अपना निशाना बनाना है…” यूपी के मऊ के चिरैयाकोट थाना क्षेत्र का बहलोलपुर गांव, जहां अनुज कनौजिया का जन्म हुआ, वहां के खेतों में कभी उसने भी बचपन में उधम मचाया होगा, कभी मां की गोद में सुकून पाया होगा, लेकिन जब बड़ा हुआ, तो उसकी दुनिया बदल गई। कहते हैं संस्कार और संगत तय करते हैं कि इंसान क्या बनेगा—अनुज की संगत बिगड़ चुकी थी। गांव-कस्बों के झगड़े, रंगबाजी, छोटे-मोटे झगड़े उसका शौक बन गया। लेकिन असली मोड़ तब आया जब एक लड़की उसकी जिंदगी में आई।


जब प्रेम बना अपराध की पहली सीढ़ी
वह लड़की किसी और से परेशान थी, उसने अनुज से मदद मांगी। अनुज ने बिना सोचे-समझे उस शख्स को सरेआम गोली मार दी। यह उसका पहला अपराध था और पहले अपराध ने ही उसकी जिंदगी की दिशा बदल दी। पुलिस ने उसे पकड़ा, लेकिन जेल में जाकर वह सुधरा नहीं, बल्कि और गहरे दलदल में उतर गया। इसी बीच मुख्तार अंसारी गैंग की नजर उस पर पड़ी। “दो हाथों में पिस्तौल पकड़कर एक साथ गोली चलाने वाला लड़का”—ऐसे लोगों की गैंग में हमेशा जरूरत होती है। मुख्तार अंसारी के अच्छे दिन चल रहे थे। राजनीति और अपराध का गठजोड़ चरम पर था। इस दौरान उसे ऐसे शूटरों की जरूरत थी जो बिना डर-भय के गोली चलाने का दम रखते हों—और अनुज को तो पहली ही हत्या का कोई पछतावा नहीं था। 2009 में मऊ के चर्चित ठेकेदार मन्ना सिंह की हत्या में वह पहली बार गैंग के लिये उतरा। दिनदहाड़े यूनियन बैंक के सामने ठेकेदार को गोलियों से छलनी कर दिया गया। इसके बाद कई सालों तक मऊ और गाजीपुर में उसका खौफ बढ़ता गया। 2016 तक गोरखपुर जेल में बंद रहा, फिर मेरठ जेल भेज दिया गया। लेकिन जेल में जाने के बावजूद उसका रसूख कम नहीं हुआ, उसने वहां भी अपना नेटवर्क बना लिया। कहते हैं कि बचपन से ही वह दबंग प्रवृत्ति का था, लेकिन कॉलेज के दिनों में उसका झुकाव अपराध की ओर बढ़ गया।

जब जेल से ऑपरेट करने लगा गैंग
जेल में रहते हुये भी अनुज ठेकेदारों, व्यापारियों से रंगदारी वसूलता रहा। फोन कॉल पर ही सुपारी तय होती और हत्या का प्लान बनता था। उसकी पत्नी रीना राय उसकी मदद करने लगी और खुद भी अपराध की दुनिया में उतर आई। लेकिन 2023 में झारखंड पुलिस ने रीना को गिरफ्तार कर लिया और गैंग को तगड़ा झटका लगा।

फरारी और आखिरी जंग
2021 में कोर्ट ने उसकी संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया गया। इसके बाद वह फरार हो गया और लगातार अपने ठिकाने बदलने लगा। 2 महीने से वह झारखंड के जमशेदपुर के भूमिहार मेंशन में छिपा था। STF ने उस पर 2.5 लाख का इनाम घोषित कर दिया। उसका नेटवर्क झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और नेपाल तक फैल चुका था।
एनकाउंटर की रात और ‘खून का हिसाब’
बीते शनिवार रात यूपी STF और झारखंड ATS की टीम ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। शूटर अनुज को सरेंडर करने का मौका दिया गया, लेकिन उसने जवाब में फायरिंग शुरू कर दी। दोनों हाथों में पिस्तौल लेकर वह खिड़की से गोलियां बरसाने लगा। STF के DSP डीके शाही को गोली लगी, लेकिन उन्होंने पीछे हटने के बजाय जवाबी हमला किया। 30 मिनट के भीतर गोलियों की आवाज थम गई और अनुज का खून बहकर उसके अंत की कहानी लिख गया।

“बंदूक उठाने वाला बंदूक से ही मरेगा”
जिस शूटर ने अपनी बंदूक से सैकड़ों परिवारों को उजाड़ा, उसकी मौत के बाद मऊ में होली और दिवाली एक साथ मनाई गई। पीड़ित परिवारों ने मिठाइयां बांटी, दीये जलाये, क्योंकि 16 साल बाद इंसाफ हुआ था। “मुख्तार अंसारी चला गया, अब उसका शूटर भी खत्म…“—यह आवाज हर गली में गूंज रही थी। कभी जो शूटर बनकर दूसरों की जिंदगी का फैसला करता था, आज उसकी अपनी कहानी का आखिरी पन्ना गोलियों से लिखा गया।
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