Hazaribagh(Sunil Sahu) : ”धीरे-धीरे करके सब बिरहोर मर रहा है, का करें, बाबू, न पीने को पानी है न रहने को घर न आने-जाने का कोई रास्ता, घर द्वार बनाने को बोले थे, केवल गड्ढा खोदकर चले गये। एगो अफसर बाबू बाजार जाने के वास्ते गाड़ी देने का वादा कर गये थे कि रोज 2 बजे के बाद गांव में गाड़ी आयेगा, जिसको बाजार-हॉस्पिटल जहां जाना हो, चले जाना। आजतक कोई गाड़ी नहीं आया। बहुत बुरा हाल है हम लोगों का, कोई तो होगा कि हमलोगों के दर्द को भी समझेगा। अगर यहीं हाल रहा तो गरदा और काला पानी पी-पी कर जो भी बिरहोर बचा है, वो भी मर जायेगा।” यह कहना है हजारीबाग के केरेडारी प्रखंड के पगार गांव में रहनेवाली कुछ बिरहोर महिलाओं का। बिरहोर ममता कुमारी एवं आरती का कहना है कि गांव के नजदीक के एक बड़ी कंपनी के कुछ लोग गांव में आये तो, बड़ा-बड़ा बात करके चले गये, कुछ भी उन्हें नहीं मिला। सुनें क्या बोली बिरहोर महिलायें ममता, आरती वगैरह-वगैरह…
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