UP : लखनऊ की गर्मी भरी सुबह में जब शहर करवट बदल रहा था, तब एक पिता अस्पताल के बाहर खड़ा अपनी ढाई साल की बच्ची की आंखों में बुझते सपनों को देख रहा था। नर्सें चुप थीं, डॉक्टरों की आंखों में गुस्सा था और शहर के दिल में आग। 5 जून की सुबह थी, जब इंसानियत ने हार मानी, और एक दरिंदा अपने ही पड़ोस में बच्ची को नर्क दिखा गया। वो बच्ची जिसके खिलौने अब भी कोने में पड़े थे, उसकी चूड़ियों की खनक अब सिर्फ खामोशी में गूंज रही थी। दीपक वर्मा, नाम वही, जो अब नफरत की मिसाल बनेगा। CCTV कैमरों ने उसकी करतूतों को कैद किया और पुलिस ने कसम खाई, या तो गिरफ्तारी या अंतिम सांस। DCP सेंट्रल आशीष श्रीवास्तव ने पांच टीमें उतारीं, फिर मुखबिर ने बताया,
“वो भागने वाला है, अगर अभी नहीं पकड़ा तो फिर कभी नहीं।” इसके बाद फिर शहर के नाम का एक नया अध्याय हुआ। एनकाउंटर। पुलिस की घेराबंदी हुई, दीपक ने हथियार निकाले, गोली चलाई, लेकिन पुलिस की गोली ने उसकी छाती चीर दी, जिसने एक नन्हीं सी जान को किसी लायक नहीं छोड़ा।
ढाई साल की बच्ची के गुनहगार का एन’काउंटर…
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