Bokaro : प्रकृति की हरियाली के बीच, ललपनिया की पहाड़ियों पर आज ऐसा लगा मानो धरती ने भक्ति का वस्त्र पहन लिया हो। लुगुबुरू घांटाबाड़ी धोरोमगाढ़ में सोमवार सुबह शुरू हुआ राजकीय महोत्सव 2025, परंपरा, लोकगीत और श्रद्धा की धारा में नहाया हुआ नजर आया। “जय लुगुबाबा” के गगनभेदी नारों और मांदर की थापों से पूरा इलाका गूंज उठा, उस वक्त लगा, पहाड़ों में जैसे पुरखों की आत्मायें भी झूम उठीं। पहले ही दिन लुगु पहाड़ पर दस हजार से अधिक श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। सूर्योदय के संग-संग लोग पारंपरिक पोशाकों में गीत गाते, मांदर बजाते,लुगुबाबा के चरणों तक पहुंचे, जैसे हर पग में भक्ति, हर नजर में विश्वास। एक श्रद्धालु की आंखों में चमक थी, “लुगुबाबा हमारे पुरखों की आत्मा हैं, हमारे धर्म और धरती के रक्षक। यहां आकर आत्मा को शक्ति मिलती है।”
लोक संस्कृति की झंकार
यह महोत्सव केवल पूजा नहीं, बल्कि जनजातीय अस्मिता और एकता का जीवंत उत्सव है। संथाली और अन्य जनजातीय समुदायों ने रंगीन परिधानों में पारंपरिक नृत्य-गीतों से वह दृश्य रचा, जहां संगीत नहीं, संस्कृति बोलती है।बोकारों के DC अजय नाथ झा और SP हरविंदर सिंह ने पूजा-अर्चना कर महोत्सव का शुभारंभ किया। आवास के लिये टेंट सिटी, रेलवे स्टेशनों से नि:शुल्क बस सेवा, खिचड़ी सेवा, पेयजल, स्वास्थ्य शिविर और सुरक्षा व्यवस्था, सब कुछ सधे और समर्पित अंदाज में तैयार था। DC ने कहा कि लुगुबुरू महोत्सव हमारी मिट्टी की खुशबू और संस्कृति की आत्मा है, यह पर्व झारखंड की पहचान को विश्व पटल पर स्थापित करता है। SP हरविंदर सिंह की देखरेख में पूरे परिसर में पुलिस बल, ड्रोन निगरानी और CCTV नियंत्रण कक्ष की व्यवस्था की गई है। हर आगंतुक सुरक्षित और सहज महसूस करे, यही बोकारो पुलिस का संकल्प है।
झार.टीवी से सीधा प्रसारण
Jhargov.tv, YouTube और Facebook के माध्यम से देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु लुगुबाबा की आराधना और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद उठा रहे हैं। जिनके कदम पहाड़ तक नहीं पहुंचे, उनके दिल तक भक्ति जरूर पहुंची।लुगुबुरू घांटाबाड़ी धोरोमगाढ़, सांताली समाज का सबसे पवित्र तीर्थ, जहां हर वर्ष हजारों लोग धरती, जल, जंगल और जन के पवित्र बंधन को नमन करते हैं। यह पर्व कहता है, जहां मिट्टी की खुशबू, वहां ही ईश्वर का निवास है।








