Chouparan(Krishna Paswan) : रात के तीसरे पहर की चुप्पी में भगहर गांव की झाड़ियों से एक सन्नाटा रिस रहा था, मानो हर पत्ता किसी राज का पहरेदार हो। झारखंड-बिहार सीमा पर बसा यह छोटा-सा गांव बाहर से जितना शांत था, भीतर उतना ही उबाल से भरा। गांव की गलियों में हर तीसरे घर की दीवारें पुरानी थीं, लेकिन उन दीवारों के पीछे चल रहा था नया कारोबार, जहरीले मुनाफे का कारोबार। बीती रात इस खामोश साजिश को तोड़ने के लिये एक जीप निकली, जिस पर लिखा था “उत्पाद विभाग”, और भीतर बैठे थे इंस्पेक्टर सुमितेष कुमार, जिनकी आंखें धुएं में छिपे धंधों की परतें पढ़ना जानती थीं। “झाड़ियों के पीछे के घर में कुछ बड़ा छुपा है, साहब। “सूचना देने वाला ग्रामीण कांपती आवाज में बोला। सुमितेष ने सिर्फ इतना कहा, “अगर ये सही निकला तो आज एक बवाल उठेगा।”
डोरियों पर सूखते कपड़े और चूल्हे की राख के पीछे छुपा था ₹2.5 लाख की विदेशी शराब और स्प्रिट का जखीरा। एक पुराना लकड़ी का संदूक खोला गया, तो अंदर बोतलों की कतारें झिलमिलाईं, मानो मौत की खुशबू उस गांव की मिट्टी में मिल गई हो। आशंका है कि जब्त दारू नकली भी हो सकती है। इंस्पेक्टर सुमितेष जान चुके थे, ये तो सिर्फ पहला परदा है, असली सौदागर तो पर्दे के पीछे बैठा है, और फिर नाम सामने आये, मुकेश यादव, उम्र 32 — जिसकी आंखों में सिर्फ लालच था। विकास यादव, उम्र 22 — मासूम चेहरा, लेकिन इरादे काले। मनोज यादव — जिसकी चुप्पी में छुपा था नशे का शोर। तीनों भगहर गांव के ही थे और अब उनके हाथ में सिर्फ हथकड़ी थी।












