रांची : जैसी आशंका थी, ठीक वैसा ही हुआ अंत। जंगल की जमीं पर खून से लथपथ जब लाश पड़ी थी, तो ऊपर मंडरा रहे थे चील और कौवे। न कोई अपना न कोई बेगाना। क्यों जियें क्यों मरे, कोई वसूल नहीं। डराते-डराते खुद ऐसा निपट गया कि उसके बलबूते भौंकने वाले हो गए अंडरग्राउंड। उसकी लाश को निहारते लोग दूर-दूर से बस एक ही शब्द बोलते रहे कि ऐसा ही होना था इसका अंत। दूसरे को गोली मारने वाला एक दिन खुद गोली खाता है। पुलिस की बांछे खिली और उनमें एक नई ऊर्जा और ताकत का संचार हुआ कि यह काम मुश्किल नहीं। बस नाम और खुली छूट देते जाओ और गिनते जाओ ऐसे समाज के दुश्मनों की लाशें। आज पुलिस ने जिसे ठोक डाला, उसकी तलाश वर्षों से पुलिस को थी। नाम है इसका जिदन गुड़िया। ओहदा मिला था पीएलएफआई में जोनल कमांडर का। ऐसे बिगड़े मिजाज का था जिदन कि जब जो चाहता, कर डालता था। किसी का खून कर देना उसके लिए मामूली बात थी। सरेंडर कर चुके कुछ साथियों ने उसका भी मन बदलने का प्रयास किया था। पर किसी की नहीं सुनी और भौंकते-भौंकते मारा गया।
हमेशा बेखौफ और एके-47 के साये में चलने वाला जिदन गुड़िया खूंटी के तपकारा के कोचाकरंज टोली का रहने वाला था। कदकाठी से मजबूत जिदन गुड़िया को खींच ले गया जंगल की ओर। एक से एक बढ़कर एक ऐसे कारनामे कर डाला कि देखते ही देखते उग्रवादी संगठन पीएलएफआई का बन गया जोनल कमांडर। वह अपना जानी दुश्मन पुलिस और पूंजीपतियों को मानता था। कई तरह के अत्याधुनिक हथियार चलाने में माहिर जिदन गुड़िया का सबसे पसंदीदा हथियार था एके-47। कई लोगों को मौत के घाट उतार देने वाले लिस्ट में कुछ पुलिस वाले भी शामिल हैं। उसके अपराध की लिस्ट इतनी लंबी हो गई कि उसका सही-सही आंकड़ा जुटाने में लग गई है झारखंड पुलिस। अबतक जितने आंकड़े जुटाए जा चुके हैं वो काफी चौंकाने वाले हैं। इसमें हत्या, फिरौती के लिए अपहरण, रंगदारी, लेवी, आगजनी सहित 17 सीएलए एक्ट के मामले दर्ज हैं। वह सूबे के विकास का दुश्मन था। विकास कार्य में लगे ठेकेदार-मुंशी को डराना और मन की मुराद नहीं होने पर उन्हें ठिकाना लगाना उसकी फितरत बन गई थी। वह संगठन में दूसरा स्थान रखता था। सुप्रीमो दिनेश गोप का सबसे मजबूत और तगड़ा हाथ माना जाता था। उसके मारे जाने से संगठन को करारा झटका लगा है।







