Garhwa(Nityanand Dubey) : राजधानी रांची के आलीशान रेडिसन ब्लू होटल की चमचमाती रोशनी के बीच जब मंच से एक नाम गूंजा, डॉ. एमएन खान, तो तालियों की गड़गड़ाहट जैसे गढ़वा के उन गरीब मरीजों की दुआओं की आवाज बन गई, जिन्हें कभी बिना एक पैसा लिये ठीक किया गया था। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने जब उन्हें मोमेंटो और प्रशस्ति पत्र सौंपा, तो वह सिर्फ एक पुरस्कार नहीं था, वो उस सेवा का सम्मान था जो एक पिता ने शुरू की थी, और एक बेटे ने उसे कंधों पर लेकर मसीहा बना दिया। अवार्ड लेने के बाद डॉ. खान की आंखों में चमक थी, पर आवाज में नम्रता, बोले “पिताजी के नक्शे-कदम पर चल रहा हूं। यह सम्मान उन्हीं को समर्पित है। सेवा मेरा धर्म है, और जनता मेरी पूंजी।”
डॉ. एमएन खान, वही नाम, जिसने गढ़वा के हर चेहरे पर मुस्कान लाने की जिम्मेदारी ली है। जिनके लिये दांतों का दर्द सिर्फ एक रोग नहीं, बल्कि सेवा का अवसर है। जो निःशुल्क इलाज करके यह साबित करते हैं कि डॉक्टर सिर्फ फीस के मोहताज नहीं होते, वे तो किसी मां की फटी चप्पल और किसी किसान के झुके कंधों से भी सेवा की कीमत चुका लेते हैं।उनका सफर 1970 में उनके पिता डॉ. ए.क्यू. खान के साथ शुरू हुआ था, जब गढ़वा में लोग यह भी नहीं जानते थे कि दांत का भी कोई डॉक्टर होता है। आज वही जनता डेंटल क्लिनिक इलाके की सबसे पुरानी और विश्वसनीय पहचान बन चुकी है। हाल ही में उन्होंने जो निःशुल्क चिकित्सा शिविर लगाया, उसमें सैकड़ों मुस्कुराते चेहरे उनकी सेवा की गवाही दे रहे थे और अब जब रांची के मंच पर उनका नाम चमका, तो गढ़वा की गलियों में उत्सव-सा माहौल बन गया।
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