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डॉ भीमराव आंबेडकर की पुण्यतिथि आज, जानिये उनसे जुड़ी खास बातें

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नई दिल्‍ली : भारत के संविधान निर्माता डॉ भीमराव आंबेडकर की छह दिसंबर को पुण्यतिथि है। महान समाज सुधारक और विद्वान बाबासाहेब का निधन छह दिसंबर 1956 को दिल्ली स्थित उनके घर पर हुआ था। उनके महापरिनिर्वाण दिवस पर देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला,  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

प्रधानमंत्री ने बाबासाहेब को पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि हम उनके सपनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा, ‘महापरिनिर्वाण दिवस पर महान डॉ बाबासाहेब आंबेडकर को श्रद्धांजलि देता हूं। उनके विचार और आदर्श आज भी लाखों लोगों को ताकत देते रहते हैं। हम उनके राष्ट्र के प्रति सपनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’

डॉक्टर आंबेडकर ने अपना पूरा जीवन सामाजिक बुराइयों जैसे छुआछूत और जातिवाद के खिलाफ संघर्ष में लगा दिया। इस दौरान बाबा साहेब गरीब, दलितों और शोषितों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे। आजाद भारत के वो पहले विधि एवं न्याय मंत्री बने। आंबेडकर ही भारतीय संविधान के जनक हैं।

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जानिये उनसे जुड़ी पांच अहम बातें

  • बाबा साहेब आंबेडकर का जन्म मध्य प्रदेश के एक गांव में हुआ। हालांकि, परिवार मूल रूप से महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले से था। पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का नाम भीमाभाई थी। आंबेडकर महार जाति से थे। उनके साथ भेदभाव किया जाता था।
  • आंबेडकर स्कूली दिनों से ही पढ़ाई में अव्वल थे लेकिन तत्कालीन समाज में उन्हें जाति के आधार पर कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कहा जाता है कि इसकी वजह से उन्हें में एडमिशन के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, उनकी कुशाग्रता की वजह से उनके अध्यापक उनसे काफी स्नेह रखते थे।
  • मुंबई से डिग्री लेने के बाद उनका चयन अमेरिका की विश्व प्रसिद्ध कोलंबिया यूनिवर्सिटी में हो गया। यहां से उन्होंने पॉलिटिकल साइंस यानी राजनीतिक विज्ञान में ग्रेजुएशन किया। 1916 में उन्हें पीएचडी अवॉर्ड की गई और यहीं से उनके नाम के आगे डॉक्टर लग गया।
  • आंबेडकर सिर्फ राजनीतिक विज्ञान के ही महारथी नहीं थे बल्कि उन्हें इकोनॉमिक्स यानी अर्थशास्त्री का भी काफी ज्ञान था। वो इसमें डॉक्टरेट हासिल करना चाहते थे लेकिन स्कॉलरशिप खत्म हो जाने की वजह से यह उपलब्धि हासिल नहीं कर सके। कुछ वक्त बाद वो मुंबई के एक कॉलेज में प्रोफेसर हो गए।
  • आंबेडकर ने 1936 में लेबर पार्टी का गठन किया। डॉक्टर आंबेडकर विद्वान व्यक्ति थे। उन्होंने समाज में व्याप्त बुराइयों के लिए आजीवन संघर्ष किया। देश की आजादी की बारी आई तो उन्हें संविधान की मसौदा समिति का अध्यक्ष बनाया गया। देश की आजादी के बाद वो पहले केंद्रीय कानून मंत्री भी बने।

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