Kohramlive : “UPI कर दो,” पिछले कुछ वर्षों में यह वाक्य भारत की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। सब्जी वाले से लेकर बड़े शोरूम तक, जेब में नकदी हो या न हो, मोबाइल से चुटकियों में भुगतान हो जाता है। लेकिन अब इस मुफ्त सुविधा पर शुल्क लगने की चर्चा तेज हो गई है। सरकार ने भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 के बाद यह संभावना बनी है कि भविष्य में UPI और RuPay डेबिट कार्ड के कुछ लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाया जा सकता है।
क्या हर UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज?
फिलहाल ऐसा नहीं है। प्रस्ताव का मतलब यह नहीं है कि हर UPI भुगतान पर शुल्क लगेगा। चर्चा इस बात की है कि बड़े कारोबारियों के लिये किये जाने वाले कुछ लेन-देन पर MDR लागू किया जा सकता है। यानी आम उपभोक्ता की छोटी खरीदारी पहले की तरह मुफ्त रह सकती है।
किस ट्रांजैक्शन पर लग सकता है शुल्क?
विशेषज्ञों के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI और रुपे डेबिट कार्ड भुगतान पर MDR लगाने पर विचार हो रहा है। दिलचस्प बात यह है कि वर्ष 2025-26 में कुल UPI भुगतान में ऐसे ट्रांजैक्शन केवल 4% थे, लेकिन रकम के हिसाब से यही भुगतान कुल लेन-देन का लगभग दो-तिहाई हिस्सा थे। यानी छोटे भुगतान करने वाले अधिकांश लोगों पर इसका सीधा असर शायद न पड़े।
कितना हो सकता है MDR?
इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है और अलग-अलग विशेषज्ञ अलग अनुमान दे रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े कारोबारियों के लिये 0.30% से 0.60% तक MDR उचित हो सकता है। वहीं, कुछ का अनुमान है कि यह 0.05% से 0.07% के बीच भी रखा जा सकता है। अंतिम दर सरकार और नियामक संस्थाओं के फैसले पर निर्भर करेगी।
आखिर शुल्क की जरूरत क्यों पड़ रही है?
UPI ग्राहक के लिये भले मुफ्त हो, लेकिन इसे चलाना मुफ्त नहीं है। मोबाइल ऐप, बैंकिंग नेटवर्क, साइबर सुरक्षा, क्लाउड स्टोरेज, केवाईसी, फ्रॉड मॉनिटरिंग, विवाद निपटान, ग्राहक सहायता और 24 घंटे चलने वाली तकनीकी व्यवस्था, इन सब पर भारी खर्च आता है। इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, UPI और RuPay का पूरा ढांचा चलाने में हर साल लगभग ₹20,000 करोड़ तक खर्च हो सकता है। फिलहाल सरकार ₹2,000 तक के छोटे व्यापारी भुगतान पर प्रोत्साहन (इंसेंटिव) देती है। यह राशि बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और थर्ड पार्टी ऐप्स के बीच बांटी जाती है ताकि छोटे व्यापारियों और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलता रहे।
अगर शुल्क लगा तो क्या बदलेगी लोगों की आदत?
एक सर्वे के मुताबिक, यदि बड़े भुगतान पर शुल्क लगाया जाता है और व्यापारी उसका बोझ ग्राहकों पर डालते हैं, तो बड़ी संख्या में लोग भुगतान का तरीका बदल सकते हैं। यानी मुफ्त और आसान डिजिटल भुगतान की आदत पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का कहना है कि किसी भी डिजिटल भुगतान व्यवस्था की लागत आखिरकार किसी न किसी को उठानी ही पड़ती है। यह बोझ कभी बैंक, कभी व्यापारी, कभी सरकार और अंततः किसी न किसी रूप में उपभोक्ता तक पहुंच सकता है। अभी UPI पर कोई नया शुल्क लागू नहीं हुआ है। सरकार ने केवल कानून में बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिससे भविष्य में जरूरत पड़ने पर ऐसे शुल्क की अनुमति दी जा सके। अंतिम फैसला, शुल्क की दर, किन कारोबारियों पर यह लागू होगा और ग्राहकों पर इसका कितना असर पड़ेगा, इन सभी बातों पर अभी स्पष्ट निर्णय आना बाकी है।















