झारखंड में डॉक्टरों का ‘काला बिल्ला’ आंदोलन…

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Ranchi : झारखंड में सरकारी डॉक्टरों की नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। DACP समेत कई मांगों को लेकर झारखंड स्टेट हेल्थ सर्विसेस एसोसिएशन यानी झासा ने अपने आंदोलन को लेकर नया कार्यक्रम जारी किया है। फिलहाल डॉक्टर इलाज बंद नहीं करेंगे, बल्कि अपनी मांगों की आवाज मरीजों के बीच पहुंचाने की तैयारी में हैं। झासा के मुताबिक 5 से 8 अक्टूबर तक सोशल मीडिया के जरिये जनता को बताया जाएगा कि आखिर सरकारी डॉक्टर आंदोलन की राह पर क्यों हैं। इसके बाद 9 और 10 अक्टूबर को राज्यभर के सरकारी डॉक्टर काला बिल्ला लगाकर मरीजों का इलाज करेंगे। झासा के सदस्य डॉ. केएम सिंह ने मीडिया को बताया कि उनकी प्रमुख मांग है कि झारखंड के सरकारी चिकित्सकों को केंद्र और बिहार सरकार की तर्ज पर DACP का लाभ दिया जाये। उनका कहना है कि विशेषज्ञ कैडर के लिए 2015 में बनाई गई नियमावली में DACP को लेकर स्पष्ट प्रावधान नहीं है। इसका नतीजा यह हुआ कि 2015 के बाद विशेषज्ञ कैडर में शामिल हुये डॉक्टरों को DACP का लाभ नहीं मिल सका। झासा का कहना है कि इस विसंगति को दूर कर डॉक्टरों को उनका हक मिलना चाहिये।

4 DACP की कैपिंग का भी विरोध

झासा ने चिकित्सक नियुक्ति नियमावली में 4 DACP की कैपिंग का भी विरोध किया है। एसोसिएशन के मुताबिक 13 दुर्गम जिलों में काम करने वाले डॉक्टरों को ही चार DACP देने और वहां पांच साल सेवा पूरी करने के बाद पहला प्रमोशन देने जैसी शर्तें उचित नहीं हैं। डॉक्टरों का कहना है कि दुर्गम इलाकों में सेवा देने वाले चिकित्सकों के साथ अलग नियम बनाना उनके हित में नहीं है। नई प्रस्तावित नियमावली में 62 वर्ष से अधिक उम्र के चिकित्सकों को प्रशासनिक पद नहीं देने के प्रावधान पर भी झासा ने सवाल उठाया है। झासा ने डॉक्टरों की अनुबंध और बीड के आधार पर भर्ती का भी विरोध किया है। आरोप है कि एक तरफ सरकारी डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति की उम्र 67 से घटाकर 65 वर्ष कर दी गई, वहीं दूसरी तरफ 70 वर्ष तक के डॉक्टरों को अनुबंध पर रखा जा रहा है। एसोसिएशन का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों की सेवा और गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े होते हैं। झासा के सदस्यों ने सोमवार को अपनी मांगों से जुड़ा मेमोरेंडम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, अपर मुख्य सचिव और झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजा है। झासा और आईएमए ने साफ कर दिया है कि अगर मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा। 21 अक्टूबर को राज्यभर के सरकारी अस्पतालों में धरना-प्रदर्शन किया जायेगा। इसके बाद मांगें पूरी नहीं होने पर 22 अक्टूबर से सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी सेवा को छोड़कर सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य सेवाएं अनिश्चितकाल के लिये बंद करने की चेतावनी दी गई है।

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