Ranchi : झारखंड आंदोलन के पुरोधा, झामुमो के संस्थापक संरक्षक और राज्य के पूर्व CM दिशोम गुरू शिबू सोरेन को आज उनके पैतृक गांव नेमरा (रामगढ़) में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। CM पुत्र हेमंत सोरेन ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। चारों ओर “गुरूजी अमर रहें” के नारे गूंज उठे। शिबू सोरेन के पार्थिव शरीर को रांची से नेमरा गांव तक अंतिम यात्रा में लाया गया। परिवार, गांव वाले, आंदोलनकारी तथा बड़ी संख्या में आम लोग सड़क किनारे फूल बरसा कर विदा देने पहुंचे। भाभी दीपमणि सोरेन आंसू भरी आंखों से बोलीं “बाबा को सादा खाना बहुत पसंद था, खेत की ताजी सब्जियां और बांस के कोपल उनकी कमजोरी थी।”

बड़े नेताओं ने भी गुरुजी को दिया अंतिम जोहार
| नेता | किस रूप में शामिल हुए |
|---|---|
| अर्जुन मुंडा (पूर्व CM) | जाम में फंसे, बाइक से नेमरा पहुंचे |
| सुदेश महतो (पूर्व डिप्टी CM) | समर्थकों संग बाइक से पहुँचे |
| राहुल गांधी | दिल्ली से रांची पहुंचे अंतिम दर्शन को |
| मल्लिकार्जुन खड़गे | अंतिम संस्कार में हुये शामिल |
राजकीय सम्मान
भारत सरकार द्वारा राजकीय सम्मान के तहत गन सल्यूट दिया गया। हजारों लोगों ने ‘जोहार गुरूजी’ कहकर अंतिम विदाई दी। राजनीति से परे भावनाओं का समुंदर उमड़ पड़ा, हर किसी की आंखें नम थीं।

याद रहे गुरूजी की 3 खास बातें
- जिनगी भर आदिवासी अधिकारों की लड़ाई लड़ी।
- सादा जीवन, सरल भोजन और मिट्टी से गहरा जुड़ाव।
- हमेशा कहते थे, “झारखंड नीक बने, तबे हमर जीवन सफल हउ।”




