Garhwa(Nityanand Dubey) : सरकारी योजनाओं की फाइलें भले मोटी होती जायें, लेकिन उनका फायदा अगर जरूरतमंद की चौखट तक न पहुंचे तो उन आंकड़ों का क्या मतलब? गढ़वा में बुधवार को हुई जिला परामर्शदात्री समिति (DLCC) की बैठक में कुछ ऐसा ही सवाल बैंकों के सामने खड़ा हुआ। समाहरणालय सभागार में DC पशुपतिनाथ मिश्रा की अध्यक्षता में हुई प्रथम त्रैमासिक समीक्षा बैठक में बैंकिंग योजनाओं की रफ्तार पर खुलकर चर्चा हुई। KCC, PMIGP, मुद्रा लोन, PMFME, NPA, और वित्तीय समावेशन समेत कई योजनाओं की समीक्षा के दौरान बैंकों के ढीले प्रदर्शन पर DC ने कड़ा रुख अपनाया।
सीडी रेशियो बढ़ा, लेकिन मंजिल अभी दूर
गढ़वा का क्रेडिट-डिपॉजिट यानी सीडी रेशियो पिछली तिमाही के 42.96 प्रतिशत से बढ़कर जून 2026 तक 49.12 प्रतिशत हो गया। सुधार जरूर हुआ, लेकिन DC इससे संतुष्ट नजर नहीं आए। इस प्रदर्शन के साथ गढ़वा राज्य में चौथे स्थान पर है। उन्होंने साफ कहा कि यह उपलब्धि पर्याप्त नहीं है। बैंकिंग व्यवस्था को और तेज करना होगा, ताकि जिले के लोगों तक कर्ज और सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से पहुंचे। बैठक में पांच कमजोर प्रदर्शन वाले बैंकों को विशेष रूप से निशाने पर लिया गया। इनमें पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक शामिल हैं। DC ने इन बैंकों को कार्यशैली में तत्काल सुधार लाने का निर्देश दिया। वहीं, बेहतर प्रदर्शन करने वाले उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक, उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक, एएसएएफ स्मॉल फाइनेंस बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और एक्सिस बैंक की सराहना की गई।
क्रॉप लोन में गढ़वा ने पूरे झारखंड को पीछे छोड़ा
बैठक से जिले के लिये एक अच्छी खबर भी सामने आई। SLBC के आंकड़ों के मुताबिक जून 2026 तक गढ़वा का क्रॉप लोन 42.29 प्रतिशत रहा और इस मामले में जिला पूरे झारखंड में पहले स्थान पर रहा। लेकिन खेती के अलावा दूसरे कर्ज की तस्वीर उतनी चमकदार नहीं रही। टर्म लोन में 369 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले महज 41.11 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई। DC ने संकेत साफ कर दिया कि मौजूदा रफ्तार से शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा। बैठक में किसानों से जुड़े मामलों को भी गंभीरता से लिया गया। DC ने निर्देश दिया कि पीएम किसान के लंबित आवेदन प्राथमिकता के आधार पर जल्द निपटाए जायें। उन्होंने कहा कि किसान को बैंक और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगवाना स्वीकार नहीं किया जायेगा। KCC बनाने की प्रक्रिया को सरल और तेज करने का भी निर्देश दिया गया, ताकि जरूरतमंद किसानों को समय पर संस्थागत ऋण मिल सके।
PMFME में 66 आवेदन, मंजूर सिर्फ 7
बैठक के आंकड़ों ने बैंकिंग योजनाओं की सुस्ती की एक और तस्वीर सामने रखी। PMFME पोर्टल से 66 आवेदन भेजे गये, लेकिन इनमें केवल सात आवेदन स्वीकृत हुये और महज चार मामलों में ऋण का वितरण हो सका। DC ने इस प्रदर्शन को असंतोषजनक बताया और आवेदनों के तेजी से निष्पादन का निर्देश दिया। बैठक के अंत में DC पशुपतिनाथ मिश्रा और उप विकास आयुक्त प्रेमलता मुर्मू ने बैंकों को साफ संदेश दिया कि सिर्फ आंकड़े बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। DC ने कहा, जिले का प्रदर्शन तभी उत्कृष्ट माना जायेगा जब लाभार्थी योजनाओं का वास्तविक लाभ समय पर प्राप्त करें और सेवा प्रदायगी की गुणवत्ता सतत बेहतर होती रहे। बैठक में ACP, BC आउटलेट्स, URC में बैंकिंग विस्तार, सर्फेसी मामलों, आरसेटी, पीएम स्वनिधि, पीएमजेडीवाई, गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी योजनाओं की भी समीक्षा की गई। बैठक में जिला परिषद अध्यक्ष शांति देवी, सांसद-विधायक प्रतिनिधि, आरबीआई प्रतिनिधि, डीडीएम नाबार्ड, जिला अग्रणी प्रबंधक, आरसेटी प्रभारी, जिला उद्योग केंद्र पलामू-सह-गढ़वा के अधिकारी और विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।







