UP : उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की बयार अब सिर्फ योजना नहीं, हकीकत बन चुकी है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने योगी सरकार के 5000 से अधिक प्राथमिक स्कूलों के मर्जर के फैसले को वैध ठहराया है।
न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने कहा “यह फैसला बच्चों के भविष्य के लिए है, न कि किसी तात्कालिक सुविधा के लिए।”
नीति नहीं, नई शुरुआत है ये
16 जून को यूपी सरकार ने आदेश जारी किया था। कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को पास के उच्च प्राथमिक या कंपोजिट स्कूलों में मिलाया जायेगा। ताकि शिक्षकों, भवनों और संसाधनों का सही उपयोग हो और बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके। लेकिन इस कदम का शिक्षक संगठनों और कुछ ग्रामीण परिवारों ने विरोध किया। उन्हें डर था कि बच्चों को अब दूर जाना पड़ेगा, नौकरी पर असर होगा, और ड्रॉपआउट बढ़ेगा। कोर्ट ने कहा “जब तक कोई नीतिगत फैसला असंवैधानिक या दुर्भावनापूर्ण न हो, कोर्ट को उसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। मर्जर का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना है, न कि किसी का हक छीनना।” इस फैसले से योगी सरकार को मिली बड़ी कानूनी राहत और राज्य को मिल गया शिक्षा में सुधार का सुनहरा मौका। सैकड़ों स्कूल एकजुट होंगे, बच्चे बेहतर शिक्षकों से जुड़ेंगे और शिक्षा सिर्फ सुविधा नहीं, भविष्य निर्माण का साधन बनेगी।



