Kohramlive : कांग्रेस के पूर्व नेता और तीन बार के सांसद सज्जन कुमार का 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे थे और बीते सात सालों से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद थे। अस्पताल सूत्रों के अनुसार उन्हें सफदरजंग अस्पताल मृत अवस्था में लाया गया। 17 दिसंबर 2018 को दिल्ली हाई कोर्ट ने सज्जन कुमार को 1984 के सिख विरोधी दंगों में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुंदीप सिंह की हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुये आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अदालत ने माना था कि उन्होंने हिंसक भीड़ को उकसाने में भूमिका निभाई। हाई कोर्ट के फैसले के अगले ही दिन उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। बाद में सुप्रीम कोर्ट में उनकी अपील भी खारिज हो गई।
तिहाड़ से अस्पताल तक
सज्जन कुमार अप्रैल 2026 में अपनी गंभीर रूप से बीमार पत्नी से मिलने के लिए सुप्रीम कोर्ट से जमानत मांग चुके थे, लेकिन अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद भी वह तिहाड़ जेल में ही बंद रहे। 23 सितंबर 1945 को जन्मे सज्जन कुमार ने राजनीति की शुरुआत 1977 में दिल्ली नगर निगम के पार्षद के रूप में की। वह 1980, 1991 और 2004 में बाहरी दिल्ली से लोकसभा सांसद चुने गये। उन्हें कभी कांग्रेस और संजय गांधी का करीबी नेता माना जाता था। उनका राजनीतिक सफर जितना लंबा रहा, 1984 दंगों का दोष सिद्ध होना उतना ही बड़ा दाग बन गया। अब उनके निधन के साथ भारतीय राजनीति का एक विवादास्पद अध्याय समाप्त हो गया।








