Garhwa(Nityanand Dubey) : सुबह के ग्यारह बज रहे थे, जब SDO संजय कुमार के सभाकक्ष में किन्नर समुदाय के कुछ सदस्य पहुंचे। हल्की-हल्की ठंड में सजीव संवाद की गर्मजोशी थी। कप में कॉफी थी, लेकिन चर्चा अधिकारों की थी। प्रशासनिक औपचारिकताओं से परे, यह एक ऐसी मुलाकात थी जहां इंसानियत का एहसास था—सम्मान और समानता के संकल्प के साथ। किन्नर समुदाय के लिए यह कोई आम दिन नहीं था। पहली बार उन्हें “कॉफी विद एसडीएम” में खास मेहमान के रूप में न्यौता मिला था। उनकी बातें सुनी जा रही थीं, सुझाव मांगे जा रहे थे और समाधान देने का भरोसा दिया जा रहा था। यह केवल संवाद नहीं था, बल्कि उनके जीवन में बदलाव की एक नई शुरुआत थी।
शिक्षा, रोजगार और पहचान पर जोर
कॉफी के इस दौर में सबसे पहले शिक्षा और स्वरोजगार की बातें हुईं। सानिया किन्नर, जो 12वीं पास हैं, ने कहा कि उनकी आगे पढ़ने की इच्छा है। वहीं, जूली किन्नर ने ब्यूटीशियन का कोर्स कर आत्मनिर्भर बनने की चाह जताई। SDO ने उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिया। किन्नरों ने अपनी रोजमर्रा की मुश्किलों की ओर ध्यान दिलाया—पहचान पत्र, आयुष्मान कार्ड, आवास योजना का लाभ और पेंशन जैसी बुनियादी सुविधायें। राधा किन्नर ने बताया कि उन्होंने खुद की जमीन तो खरीद ली, लेकिन घर बनाने के लिए सरकारी मदद चाहिये। इस पर SDO ने जल्द ही कैंप लगाकर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की बात कही।
मुख्यधारा में आने की चाह
संवाद के दौरान सबसे भावुक क्षण तब आया, जब कुछ किन्नरों ने समाज में अपनी स्थिति का दर्द बयान किया। “हम भी समाज का हिस्सा हैं, लेकिन पहचान के लिए ही संघर्ष करना पड़ता है,” कईयों ने कहा मजबूरी में नेग मांगकर गुजारा कर रहे हैं, लेकिन अगर उन्हें सही मौका मिले तो वे स्वरोजगार या नौकरी करना चाहेंगे। SDO ने ने सभी किन्नरों से मतदाता जागरूकता, सड़क सुरक्षा और स्वच्छ भारत मिशन जैसे अभियानों के एंबेसडर बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब समाज उन्हें खुले दिल से अपनायेगा, तभी असली बदलाव आयेगा। कार्यक्रम के अंत में किन्नरों ने अपनी खुशी का इजहार करते हुये कहा कि “पहली बार किसी सरकारी पदाधिकारी ने हमें इतनी इज्जत दी है।” राधा किन्नर ने समाज में नकली किन्नरों के कारण होने वाली बदनामी का मुद्दा भी उठाया, जिस पर एसडीएम ने तुरंत कार्रवाई का भरोसा दिलाया।












