Bihar : बिहार विधान परिषद में एक बार फिर सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ। CM नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के बीच तीखी बहस की चिंगारी भड़क उठी, जिसने सदन का माहौल गरमा दिया। बात महज एक हरे रंग के बैज की थी, जिस पर लिखा था— “तेजस्वी सरकार ने आरक्षण बढ़ाया, बीजेपी सरकार ने छीन लिया।” इसे देखकर नीतीश कुमार का चेहरा तमतमा उठा। उनकी आंखों में वही चिर-परिचित सियासी ग़ुस्सा झलक रहा था। वो गैलरी की ओर मुखातिब हुये और बोले—“देखिये, यह तमाशा सिर्फ इसी पार्टी में हो सकता है।”
“ये पार्टी तुम्हारी नहीं”
राबड़ी देवी ने विरोध जताया, मगर नीतीश ने बिना रुके तंज कसा—“ये पार्टी तुम्हारी नहीं, तुम्हारे पति की है। तुम मत पड़ो इसमें।” एक पल को सदन में सन्नाटा छा गया, फिर हलचल तेज हो गई। उन्होंने कहा “बेचारी पति के सहारे सत्ता में आई थीं।” गुस्से से कांपती आवाज़ में CM ने 1997 की यादें ताजा कर दीं और कहा, “जब घोटाले के बाद लालू यादव फंसे, तो उन्होंने अपनी गृहिणी पत्नी को सत्ता थमा दी, पर असली सरकार पर्दे के पीछे से चलती रही।”
सदन से सड़क तक बवाल, राजद विधायकों का धरना
इस बयान ने आरजेडी विधायकों के दिलों में आग भर दी। सदन में विरोध के बाद उन्होंने विधान परिषद की सीढ़ियों पर धरना दे दिया। इधर, डिप्टी CM सम्राट चौधरी ने नीतीश का समर्थन करते हुये कहा—“आरक्षण का फैसला सर्वसम्मति से हुआ था, इसे बीजेपी पर थोपना गलत है।”
सभापति ने जताई नाराजगी, लेकिन राजनीति की आग बरकरार
सदन के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने माहौल शांत करने की कोशिश की, मगर सियासी गर्मी कम होने का नाम नहीं ले रही थी। बिहार की राजनीति में यह एक और दिन था, जहां आरोपों के तीर चले और सत्ता के गलियारों में साज़िशों की फुसफुसाहटें गूंजती रहीं।






