Ranchi : ”पर्व त्योहारों से हमारी परंपरा, सभ्यता-संस्कृति और आस्था जुड़ी है। इससे जीवन मे उमंग, उत्साह तथा उल्लास का संचार होता है। इसी कड़ी में हम सालों-साल से परंपरानुसार सरहुल पर्व मनाते आ रहे हैं। हमारे पूर्वजों ने इस प्रकति पर्व की परंपराओं को अक्षुण्ण एवं मजबूती दी है। हमें विरासत में मिली इस परंपरा को और आगे ले जाना है।” यह कहना है CM हेमंत सोरेन का। मौका था रांची के करमटोली में आदिवासी कॉलेज छात्रावास परिसर में आयोजित सरहुल महोत्सव का। ढोल- मांदर की थाप पर थिरकते कदम, सखुआ की पत्तियों से सजी परिधानों में चमकते चेहरे और प्रकृति के प्रति अगाध श्रद्धा—यही तो झारखंड की आत्मा है!
CM हेमंत सोरेन जब यहां पहुंचे, तो मानो इस पर्व की गरिमा और बढ़ गई। उन्होंने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की, सखुआ का पौधा रोप कर प्रकृति से जुड़े रहने का संदेश दिया और कहा—”पूर्वजों से मिली इस अनमोल धरोहर को संजोकर हमें आने वाली पीढ़ी को सौंपना है।”सरहुल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक पहचान है। CM ने विद्यार्थियों को आश्वस्त किया कि “छात्रावासों का जीर्णोद्धार हो रहा है, मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बनाई जा रही है। तुम सिर्फ अपने सपनों को उड़ान दो, सरकार तुम्हारे साथ है।” समारोह में कृषि मंत्री शिल्पा नेहा तिर्की और विधायक कल्पना सोरेन ने भी पूजा कर राज्य की समृद्धि और विकास की कामना की।
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