Chaibasa/Ranchi : उमर 80 साल, पर अब भी वही जोश, जुनून और जज्बा। अपने हक और अधिकार के लिये कुछ भी कर गुजर जाना। लगातार चार दिनों तक 140 किलोमीटर तक का सफर पैदल चल कर भी वो जांबाज ना थके, ना डरे और ना ही झुके। घने जंगल और कड़ी धूप भी उन्हें नहीं रोक पाये। इस जांबाज को बेशक पता था कि पत्थरों के सीने चीरकर ही कोई रास्ते निकलते हैं। उम्र के अंतिम पड़ाव में खड़े यह जांबाज कोई और नहीं 1971 के युद्ध के हीरो पोदना बालमुचू हैं।
बिकाऊ सिस्टम के आगे नहीं हुए नतमस्तक
भारत-पाकिस्तान युद्ध में दुश्मनों के छक्के छुड़ाने में गोली खाकर लहुलूहान हुए पोदना बालमुचू का हौसला ही है कि वो कभी बिकाऊ सिस्टम के आगे नतमस्तक नहीं हुए। अपनी हक और अधिकार की बात लेकर सीधे पहुंच गये युवा CM हेमंत सोरेन तक। उन्हें CM से मिलवाया मंत्री बादल पत्रलेख ने। चाईबासा से पैदल आने में उनका साथ दिया चाईबासा के युवा नेता एवं समाजसेवी सुमित शर्मा एवं अनुप करण ने।

पोदना का हाल जान दुखी हो गये CM हेमंत
CM हेमंत सोरेन ने जैसे ही सामने खड़े पोदना बालमुजू की वीर गाथा जाने, वो उनके सामने झुक गये। उन्हें पूरा मान-सम्मान दिया। उनका दुखड़ा बड़े गौर से सुना। पोदना बालमुचू ने CM हेमंत सोरेन को बताया कि साल 1971 (भारत-पाकिस्तान) के युद्ध में लड़ते हुए उन्हें गोली लगी थी, तब वो बेतरह घायल हो गये थे। युद्ध में घायल हुए सैनिकों को भारत सरकार द्वारा शौर्य चक्र पुरस्कार स्वरूप 5 एकड़ कृषि जमीन और अन्य सुविधायें दिये जाने संबंधी लिखित आदेश दिया गया, किन्तु उन्हें आजतक यह सुविधा नसीब नहीं हुई। अपने हक के लिये पूरे परिवार के साथ SDO दफ्तर के बाहर धरना पर बैठे, किसी ने उनकी सुध तक नहीं ली। पेंशन तक उन्हें नहीं मिलता। यह जानते ही CM हेमंत सोरेन बेहद दुखी हो गये। उन्होंने तुरंत पश्चिमी सिंहभूम जिले के उपायुक्त अनन्य मित्तल को 10 दिनों के अंदर वीर पोदना बालमुचू को 5 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। वहीं सरकार द्वारा मिलने वाली हर सुख-सुविधा मुहैया कराने को कहा। मौके पर मंत्री मिथिलेश ठाकुर एवं मंत्री बादल पत्रलेख सहित अन्य लोग मौजूद थे।
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