kohramlive desk : अब युद्ध लड़ने और जीतने के तरीके बदल गए हैं। युद्ध वही जीत सकता है, जो साइबर वॉरफेयर (Cyber Warfare) में कुशल होगा। कई शहरों में चीनी सेना ने साइबर वॉरफेयर के ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट शुरू किए, जहां युवाओं को लैपटॉप वॉरियर बनाना शुरू कर दिया। नतीजा ये है कि 2000 के पहले दशक में ही चीन ने अमेरिका, आस्ट्रेलिया, जापान, कनाडा सहित कई देशों पर साइबर हमले किए। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के मुताबिक चीन की हैकर आर्मी की तादाद 50 हजार से लेकर एक लाख तक है। भारत ने साइबर वॉरफेयर के लिए 2019 में डिफेंस साइबर एजेंसी (DCA) की नींव रखी, जिसने 2021 में काम करना शुरू कर दिया। DCA की जिम्मेदारी साइबर हमलों से निपटना, जवाबी साइबर हमले करना और भविष्य के लिए साइबर रणनीति बनाना है। भारत को हर स्तर पर सतर्कता बरतना जरूरी है।
भविष्य की लड़ाइयों में नहीं हो सकेगी दुश्मन की पहचान
भारतीय वायुसेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने साफ कर दिया कि भविष्य की लड़ाइयों के लिए भारतीय सेनाओं को बहुत तेजी से तैयार होना होगा। भविष्य की लड़ाइयों में दुश्मन की पहचान तक नहीं हो पाएगी।
एयर चीफ मार्शल चौधरी ने कहा है कि नए हालात में हमें पुराने ढंग से लड़ने के तरीके बदलने होंगे। नए तरीके से सोचना होगा और नए हथियार तलाशने होंगे। दुनिया एक नेटवर्क से जुड़ रही है और कोई एक साइबर हमला हमारी पूरी कमान को बेकार कर सकता है। अगली लड़ाई में हमें पता ही नहीं चलेगा कि हम पर वार किसने किया या कौन हमारा दुश्मन है। भविष्य में कम्प्यूटर वायरस से लेकर अल्ट्रासोनिक मिसाइल तक नए हथियार होंगे और हमले सैनिक भिडंत से लेकर इंफॉर्मेशन ब्लैक आउट करने के लिए होंगे।
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