Ranchi (Akhilesh Kumar) : राजधानी रांची के लोअर चुटिया में आज जैसे ही मंदिर के पट खुले, वैसे ही मां के दर्शन के लिये भक्तों की लंबी कतार लग गई। हर ओर “जय माता दी” के जयकारे गूंज रहे थे और माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो उठा। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा पूरे विधि-विधान के साथ की गई। मंत्रोच्चार, घंटियों की मधुर ध्वनि और श्रद्धालुओं की आस्था के बीच घटस्थापना कर नौ दिवसीय नवरात्रि उत्सव की शुरुआत हुई। मंदिर में पूजा के दौरान माता को सफेद वस्त्र, कुमकुम और सफेद फूल अर्पित किये गये। पुजारी अजीत चक्रवती ने विधिवत पूजा-अर्चना कर मां का आवाहन किया। उन्होंने बताया कि मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री और भगवान शिव की अर्धांगिनी हैं। नवरात्रि के नौ स्वरूपों में इन्हें पहला स्वरूप माना जाता है। पुजारी के अनुसार, मां शैलपुत्री का रूप शांति, संयम, तपस्या और शक्ति का प्रतीक है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि सादगी, धैर्य और दृढ़ संकल्प से ही जीवन की कठिनाइयों पर विजय पाई जा सकती है। नवरात्रि के दूसरे दिन यानी शुक्रवार को मां दुर्गा के दूसरे स्वरूपमां मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जायेगी। इस दिन गुलाबी या सफेद वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। मां ब्रह्मचारिणी को कमल या गुड़हल का फूल प्रिय बताया जाता है। उनकी पूजा से धैर्य, त्याग और संयम की भावना बढ़ती है और मंगल दोष से मुक्ति की मान्यता भी है। पूजा स्थल पर भव्य पंडाल सजाया गया है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में छोटी-छोटी दुकानों की कतारें भी लग गई हैं, जिससे पूरा इलाका मेले जैसा दिखने लगा है। इस पूरे धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में श्री राम सेना के सदस्य और स्थानीय लोग पूरे उत्साह के साथ जुटे हुये हैं।






