वाराणसी: जिस बनारस की सुबह गंगा आरती से और शाम “चाची की कचौड़ी” से होती थी, वहां अब एक खामोश सन्नाटा पसरा है। लंका चौराहे की वो गहमागहमी, BHU रोड की वो खुशबू, सब कुछ मलबे में तब्दील हो चुका है। कारण बना सड़क चौड़ीकरण। इसमें करीब 35 दुकानें ध्वस्त कर दिये गये। चाची की कचौड़ी और पहलवान लस्सी अब इतिहास बन चुके हैं। कुछ लोगों का कहना है कि ये 100 साल पुरानी दुकानें थी, जिसे आज ढहा दिया गया। चाची की दुकान, जहां सुबह-सुबह गरमागरम कचौड़ी-जलेबी की खुशबू से राहगीर रुक जाते थे, अब सिर्फ धूल उड़ती है। पहलवान लस्सी, जो BHU के छात्रों से लेकर विदेशी सैलानियों तक की पहली पसंद थी, अब एक अधूरी याद बन गई।
लोक निर्माण विभाग ने मीडिया को बताया कि कई बार नोटिस दिया गया था। सड़क चौड़ीकरण जरूरी है। चेतावनी के बावजूद हटाया नहीं गया, इसलिए कार्रवाई की गई। पर बनारस के कुछ लोग कहते हैं, “ये सिर्फ दुकानों का सवाल नहीं था, ये स्वाद, पहचान और इतिहास की बात थी।” ये कार्रवाई सोसल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।




