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बताता था खुद को CBI अधिकारी, निकला बड़का फ्रॉड

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  • वो आंखों से तौल लेता है हैसियत
  • एक नटवरलाल जिसकी पहुंच सत्ता के गलियारे (सेंट्रल) तक है
  • फर्राटेदार अंग्रेजी बोलकर कर लेता है हिप्नोटाइज
  • खुद को बताता था CBI का अधिकारी
  • एक गलती ने पहुंचा दिया सलाखों के पीछे

रांची, सत्य शरण मिश्र : बताता था खुद को CBI अधिकारी, निकला बड़का फ्रॉड : बहुत गहरा है जुर्म का दलदल। जो एक बार इसमें घुसा, वो बाहर नहीं निकल सकता, लेकिन अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, हर जुर्म के पीछे कोई न कोई सबूत जरूर छोड़ता है। आइये आपको मिलाते हैं ऐसे ही एक नटरवर लाल से, जिसकी पहुंच सत्ता के गलियारे (सेंट्रल) तक है। खुद को CBI का अधिकारी बताने वाला यह शख्स वो नटवरलाल है, जो देखते ही देखते आपको लाखों का चूना लगा देगा। इसकी फर्राटेदार अंग्रेजी सुनकर आप आसानी से फंस जाएंगे इसके जाल में, लेकिन अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो कानून की नजर से बच नहीं सकता। कोई न कोई गलती उसे सलाखों के पीछे भेज ही देती है। इसके साथ भी यही हुआ।

‘CBI अधिकारी’ का नाम है अभिलाष बनर्जी

अब जरा इसके कारनामों के बारे में जान लीजिए। इस शख्स का नाम है अभिलाष बनर्जी। खुद को धनबाद के कतरास का रहने वाला बताता है, लेकिन इसका कोई एक ठिकाना नहीं है। जितने लोग इसके कॉन्टैक्ट में हैं, सबको इसने अपना अलग-अलग पता बताया है। कोई इसे रांची का रहने वाला, कोई बोकारो तो कोई कोलकाता का रहने वाला बताता है। यह साधारण सा दिखने वाला शख्स सारे गोरखधंधे करता है। ट्रांसफर-पोस्टिंग से लेकर जमीन दलाली तक के धंधे में यह सक्रिय है। चौंकाने वाली बात यह है कि सत्ता के गलियारे (सेंट्रल) तक इसकी पहुंच है। अब जरा इसके मोबाइल नंबर 6205668894 को ट्रू कॉलर पर चेक करके देख लीजिए। वहां इसकी पहचान सीबीआई अधिकारी के रूप में है। यही पहचान इसके लिए परेशानी का सबब बन गई और यह सलाखों के पीछे पहुंच गया।

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बाइक बेचने के लिए OLX पर डाला गया था विज्ञापन

रांची के मेकॉन में काम करने वाले नीरज कुमार ने अपनी पुरानी पल्सर बाइक को बेचने के लिए ओएलएक्स पर विज्ञापन डाला था। 7 अक्तूबर को अभिलाष ने बाइक खरीदने के लिए नीरज से कॉन्टैक्ट किया। जब नीरज ने ट्रू कॉलर पर अभिलाष का नंबर देखा, तो उसे बड़ी हैरानी हुई। दरअसल ट्रू कॉलर पर अभिलाष का नंबर सीबीआई का बता रहा था। नीरज को यह बात खटकी कि आखिर एक सीबीआई अधिकारी उसकी सेकेंड हैंड बाइक क्यों खरीदेगा। फिर 8 अक्तूबर को सुबह करीब 8.30 बजे अभिलाष बाइक को देखने के लिए नीरज के घर पहुंचा।

जब नीरज ने पूछताछ की तो अभिलाष ने बताया कि वह दिल्ली सीबीआई में है। अभी डेपुटेशन पर रांची आया हुआ है। नीरज ने जब उसका आईकार्ड मांगा तब अभिलाष आनाकानी कर वहां से निकल गया। अब नीरज का शक और गहरा हो गया और उसने जगन्नाथपुर थाना को फोन किया। इसके बाद पीसीआर ने अभिलाष को बिरसा चौक से पकड़ लिया। पूछताछ के दौरान अभिलाष ने पुलिस को बताया कि एक बार पहले उससे ओएलएक्स पर ठगी हो चुकी है। इसलिए वह सीबीआई के नाम का उपयोग कर रहा है ताकि थोड़ा रौब बने और उससे ठगी नहीं हो सके।

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रेंट पर ले रखा था SDM का फ्लैट

खुद को छोटा-मोटा जमीन ब्रोकर बताने वाले अभिलाष के अकाउंट में महज 32 हजार रुपये हैं, लेकिन वह लालपुर के जिस फ्लैट में रहता है, वहां वह 12500 रुपये हर महीने किराया देता है। पलामू के जिस एसडीएम के फ्लैट को अभिलाष ने रेंट पर लिया है, पिछले दो महीने से वो वहां गया ही नहीं है। उसका फ्लैट बंद है। यह दावा है फ्लैट के मालिक का। अगर वो फ्लैट में नहीं रह रहा था, तो कहां रह रहा था? तो उसका भी जवाब है हमारे पास। जी हां वो रांची के होटल प्रताप रेजिडेंसी में रह रहा था। उसने होटल को 20 हजार रुपये पेमेंट किया है। होटल रॉयल रेसिडेंसी, आकाश रेसिडेंसी और प्रताप रेसिडेंसी समेत रांची के कई होटलों के बिल उसके पास से मिले हैं। दिल्ली का होटल सफायर से भी इसका कनेक्शन है। दिल्ली में ये वहीं ठहरता है।

दिल्ली से है कनेक्शन

अब इसका दिल्ली कनेक्शन भी जान लीजिए। जमशेदपुर के रहने वाले रवि भारद्वाज दिल्ली में स्कूल की चेन चलाते हैं। रवि भारद्वाज के चचेरे भाई सेंट्रल2 कार्यालय में अधिकारी हैं। अभिलाष का दावा है कि वो रवि भारद्वाज के जरिये ट्रांसफर पोस्टिंग का काम करता है। पैरवी कर लोगों को नौकरी दिलाने का काम बड़ी आसानी से कर लेता है। जब इस बात की पड़ताल की गई तो रवि भारद्वाज ने अभिलाष को पहचानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे बस 1 बार ही अभिलाष से मिले हैं, उसके बारे में और कुछ नहीं जानते। अब सवाल यह उठता है कि अगर रवि भारद्वाज अभिलाष को नहीं पहचानते तो उनके नंबर पर अभिलाष के सैकड़ों व्हाट्सएप मैसेज कैसे पहुंच गये।

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दूर-दूर तक है व्हाट्सएप कनेक्शन

अभिलाष का व्हाट्सएप कनेक्शन बहुत दूर-दूर तक है। यह बीसीसीएल और रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करता है। कई लोगों को इसने अपना शिकार बनाया है। हजारीबाग के एक पूर्व सांसद की पोती को भी इसने नौकरी दिलाने का झांसा देकर उससे 4 लाख रुपये ठग लिये। हजारीबाग, रांची, धनबाद और रामगढ़ समेत कई शहरों में इसने लोगों को अपना शिकार बनाया है। रेलवे और बीसीसीएल का फर्जी सेलेक्शन लेटर बनाकर ये लोगों से ठगी करता था। इसके साथ 2 और भी लोग इस धंधे में शामिल हैं। अभिलाष ने उन दोनों के साथ मिलकर लोगों को किश्तों में ठगा है। पूर्व सांसद की पोती और इनके शिकार दूसरे लोगों ने अबतक इसके खिलाफ एफआईआर नहीं करायी है। दरअसल इसने उन लोगों को पैसे लौटाने का भरोसा दिया था, लेकिन अब अभिलाष खुद पुलिस की गिरफ्त में है। ऐसे में उसके द्वारा ठगे गये लोगों के पैसे मिलने की उम्मीद पर पानी फिर गया है।

पॉलिटेक्निक का छात्र अभिलाष पढ़ा-लिखा है, लेकिन जल्द और ज्यादा पैसे कमाने की लालच में इसने जाने-अनजाने में जुर्म के दलदल में अपना पैर रख दिया। लोगों को धोखा देकर उनकी मेहनत की कमाई को पल भर में हड़पने वाला यह शातिर फिलहाल शिकंजे में है।

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