Bihar : बिहार में विधानसभा चुनाव करीब है। जातीय समीकरणों के साथ अब “डिजिटल पहुंच” भी राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। सत्ता में हो या विपक्ष में, हर दल डिजिटल शिक्षा और तकनीकी सुविधाओं को चुनावी मुद्दा बनाकर युवाओं और ग्रामीण वोटरों को रिझाने की कोशिश में है। Government of Bihar के जातीय सर्वे 2023 के आंकड़े के हवाले से मीडिया में आई खबरों के अनुसार, बिहार में डिजिटल संसाधनों की पहुंच बेहद सीमित और असमान है। 98.63% आबादी के पास कंप्यूटर या लैपटॉप नहीं है। केवल 1.15% आबादी के पास इंटरनेट वाला कंप्यूटर/लैपटॉप है। 0.22% के पास कंप्यूटर तो है, लेकिन इंटरनेट नहीं।
मोबाइल इंटरनेट ही है ‘डिजिटल लाइफलाइन’
जहां कंप्यूटर का आंकड़ा बेहद कम है, वहीं मोबाइल इंटरनेट के मामले में तस्वीर कुछ अलग है। Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) के अनुसार सितंबर 2023 तक बिहार में 70 मिलियन इंटरनेट यूजर्स थे, जिनमें ज्यादातर मोबाइल के जरिये ऑनलाइन हैं। यानी कंप्यूटर भले ही न हो, लेकिन स्मार्टफोन ने डिजिटल खाई को कुछ हद तक पाटने का काम किया है।
जातियों के हिसाब से डिजिटल पहुंच
| जाति वर्ग | इंटरनेट वाला कंप्यूटर | बिना इंटरनेट कंप्यूटर |
|---|---|---|
| सामान्य वर्ग | 3.15% | 0.37% |
| पिछड़ा वर्ग | 1.27% | 0.25% |
| अति पिछड़ा वर्ग | 0.64% | 0.17% |
| अनुसूचित जाति (SC) | 0.37% | — |
| अनुसूचित जनजाति (ST) | 0.56% | 0.20% |
| अन्य जातियां | 5.56% | — |
ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि डिजिटल संसाधनों तक पहुंच जाति और आर्थिक स्थिति से गहराई से जुड़ी है। सामान्य और ‘अन्य’ वर्गों की डिजिटल पहुंच सबसे अधिक है, जबकि पिछड़े, अति पिछड़े और एससी-एसटी वर्ग सबसे पीछे हैं।












