Ranchi : रांची की गलियों में इन दिनों अंधेरा सिर्फ बिजली कटौती से नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के साये से भी गहरा गया है। हिनू की तंग गलियों से लेकर कांटाटोली के भीड़भरे चौक तक, डोरंडा की दुकानों से लेकर धुर्वा की कॉलोनियों तक, हर जगह एक ही सवाल है, “कब तक?” श्रमिक संघ अध्यक्ष अजय राय ने राजधानी की चरमराई बिजली व्यवस्था को लेकर विभागीय अफसरों पर हमला बोलते हुये कहा कि “राजधानी के लोग रोजाना अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। पांच-पांच साल से एक ही कुर्सी पर जमे इंजीनियर और अफसर मलाई काट रहे हैं। कभी प्रमोशन तो कभी आंतरिक फेरबदल का बहाना, ये लोग रांची छोड़ने को तैयार ही नहीं। आखिर किसके संरक्षण में ये बैठे हैं?”
जनता पर अन्याय की परतें
अजय राय ने राजधानी की बिजली व्यवस्था का कच्चा-चिट्ठा खोलते हुये आरोपों की बौछार कर दी। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को डेढ़ साल का मनमाना बिजली बिल थमा दिया जाता है। किसी पर 2 लाख, तो किसी पर 5 लाख तक का झूठा बकाया चढ़ा दिया जाता है। गरीब परिवारों पर करोड़ों रुपये तक के फर्जी बिल थोपे जा रहे हैं। छोटे दुकानदारों और मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं के कनेक्शन बिना नोटिस काट दिये जाते हैं। स्मार्ट मीटर के नाम पर वसूली, शिकायतों पर कोई सुनवाई तक नहीं होती।
रांची की रातें, अंधेरे की कैद
हिनू, बूटी मोड़, कांके रोड, लालपुर, कोकर और HEC की बस्तियों में रोजाना 5-6 घंटे की कटौती आम बात हो चुकी है। बच्चों की पढ़ाई ठप, दुकानदारों का कारोबार चौपट और घरों की रसोई तक प्रभावित होती है। अजय राय ने तंज कसा कि “बिजली विभाग अब सेवा देने वाला संस्थान नहीं, बल्कि जनता को लूटने और प्रताड़ित करने वाला गिरोह बन चुका है।”
आंदोलन की चेतावनी
संघ अध्यक्ष अजय राय ने CM हेमंत सोरेन से मांग की कि राजधानी की बिजली व्यवस्था पर तत्काल उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हो। 3 साल से जमे अफसरों को हटाकर उनकी भूमिका की जांच की जाये। उपभोक्ता समस्याओं के समाधान के लिये विशेष टास्क फोर्स गठित की जाये। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि “अगर सरकार ने अब भी कार्रवाई नहीं की तो हम सड़क से सदन तक आंदोलन छेड़ेंगे। यह लड़ाई अब आर-पार की होगी। जनता अंधेरे में जीने को मजबूर नहीं रहेगी।”




