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राजधानी जगमग, बच्चों को बचाये तेज आवाज और धुंए से जरूर…

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Ranchi : राजधानी रांची में दीपावली को लेकर चारों तरफ गजब की खुशियां है। छोटी-बड़ी इमारत और घरों के आंगन से बिखरी रंग-बिरंगी रोशनी और जगमग दीये से नजारा बिल्कुल अलग है। बच्चों में पटाखे फोड़ने को लेकर अजीब सा उत्साह है। पटाखों की दुकानें देर रात तक भीड़ खींचती रही। संभावना है कि इस बार राजधानी में पटाखों का धूंआ ही धूंआ होगा। ऐसे में छोटे बच्चों का ख्याल रखना भी बेहद जरूरी है। पटाखे फोड़ते समय बच्चों के साथ बड़ों की मौजूदगी बेहद जरूरी है। परिवार के साथ कोई पर्व त्योहार मनाने का मजा ही कुछ और है। वहीं मजा में कोई खरोंच नहीं लगे, इसे लेकर रांची पुलिस प्रशासन भी पुख्ता इंतजाम कर रखे हैं। वहीं राजधानी में चोरी-छिपे ताश के पत्ते भी खूब फेटे जा रहे हैं। एक जुआड़ी ने राज खोला कि बीते एक हफ्ते से जीत-हार का खेल शुरू है। जुआ खेलने और खेलाने को लेकर कुछ खास जगह भी पॉश इलाके में हायर किये गये हैं। नाल उठानों वालों की भी कोई कमी नहीं है। दीपावली से पहले 7 लाख रुपये जीत कर आये एक शख्स के घर के आंगन में चमचमाती गाड़ी देख पड़ोसियों ने खूब चुटकी भी ली लगता है इस बार किस्मत साथ दे गई। सोई तकदीर जाग गई। अबतक पुलिस की तरफ से किसी जुये अड्डे से चौंकाने वाली खबर नहीं आई है।

अनदेखी से किरकिरा हो सकता त्योहार का मजा

दीपावली में छोटे-छोटे बच्चों पर विशेष गौर करने की जरूरत है, जरा सी अनदेखी से त्योहार का मजा किरकिरा हो सकता है। शहर के कुछ जाने-माने डॉक्टरों का भी यहीं कहना है कि पटाखे के जोरदार आवाज और धूंआ बच्चे के लिये घातक हो सकता है। तेज आवाज और धुएं से बच्चों के दिमाग और उनके लंग्स पर सीधा असर पड़ता है। डॉक्टरों का कहना है कि दिवाली में धुंए लेवल ज्यादा हो जाता है। धूंआ पीने से नवजात और छोटे बच्चों को बचाना बेहतर है। धुएं से बच्चों के लंग्स पर असर पड़ सकता है। यहीं आगे चलकर अस्थमा बीमारी में कन्वर्ट हो जाता है।  वहीं तेज आवाज का सीधा असर कान और दिमाग पर पड़ता है। बच्चों के कान नाजुक होते हैं। राजधानी के कुछ डॉक्टरों का कहना है कि पटाखेबाजी की वजह से फैले केमिकल और धुएं से ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। इससे हृदय गति घटती बढ़ती रहती है और पल्स रेट में भी उतार-चढ़ाव होता है। वहीं नवजात के दिमाग पर सीधा असर डालता है। एलर्जी का भी खतरा बना रहता है। कुछ शिशु रोग विशेषज्ञों का कहना है कि 50 डेसिबल से ज्यादा आवाज घातक है। आवाज वाले पटाखों से परहेज करें। बच्चों को पूरा शरीर पर सूती का कपड़ा पहनाएं, जिसमें उनका हाथ पैर और शरीर का सारे हिस्से ढके हों। दीपावली के समय में जब आसपास तेज आवाज के पटाखे के आवाज और वातावरण में धुएं फैलने लगे तो अपने घर के दरवाजे और खिड़की को बंद कर दें ताकि बच्चे उस वातावरण के संपर्क में ना आ सके। वहीं तेज आवाज या फिर धोने के कारण बच्चे में किसी भी तरह की समस्या हो तो शिशु रोग विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करें।

दीपावली में इन बाताें का रखें जरूर ख्याल 

  • भीड़-भाड़ इलाकों में पटाखा न छोड़ें
  • बच्चों को अकेले पटाखा न छाेड़ने दें
  • हाथ में लेकर पटाखा न छोड़ें
  • दमा के मरीज पटाखा के धुएं से दूर रहें
  • सूती कपड़े पहनकर पटाखा छोड़ें
  • पटाखा जलाने के लिए लंबी अगरबत्ती या फुलझड़ी का इस्तेमाल करें
  • पटाखे की दुकान के पास पटाखे न छाेड़ें
  • संकरी जगह पर राॅकेट न चलाएं
  • खतरनाक या तेज आवाज वाले पटाखाें के पास बच्चाें काे न जाने दें
  • ढीले-ढाले कपड़े पहनें
  • पटाखा जेब में हरगिज न रखें
  • खुली जगह पर पटाखा छोड़ें
  • ज्वलनशील पदार्थ जहां हो, वहां पटाखा न छोड़ें
  • जूता-चप्पल पहनकर पटाखा छोड़ें
  • अधजले पटाखे काे दाेबारा न छाेड़ें
  • जहां आतिशबाजी करें, नजदीक में पानी रखें
  • पटाखा नहीं फूटे तो फौरन उसके नजदीक न जाएं
  • बंद डिब्बाें में पटाखा न फाेड़ें

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