Kohramlive : भारतीय सड़कों पर ट्रैफिक का पहिया लिंग देखकर नहीं घूमता और न ही कानून का डंडा। सोशल मीडिया की गलियों में अक्सर एक भ्रम तैरता है, “महिला ड्राइवर को पुरुष पुलिस नहीं रोक सकती।” लेकिन हकीकत यह है कि मोटर व्हीकल एक्ट की किताब में ऐसा कोई पन्ना ही नहीं, जहां महिला और पुरुष के लिये अलग-अलग नियम लिखे हों। कानून की भाषा साफ है कि ट्रैफिक नियम तोड़ने पर कार्रवाई सब पर बराबर लागू होगी, चाहे स्टेयरिंग पर महिला हो या पुरुष।
क्या कहता है कानून?
- मोटर व्हीकल एक्ट पूरी तरह जेंडर-न्यूट्रल है
- पुरुष ट्रैफिक पुलिस अधिकारी महिला ड्राइवर को रोक सकते हैं
- वाहन रोकना, कागजात जांचना या चालान काटना गिरफ्तारी नहीं माना जाता
- इसलिए महिला अधिकारी की मौजूदगी अनिवार्य नहीं होती
- नियम सभी राज्यों में समान और निष्पक्ष प्रवर्तन पर जोर देते हैं
रात में क्या अलग नियम हैं?
रात के सन्नाटे में सुरक्षा को लेकर संवेदनशीलता जरूर बरती जाती है। जहां संभव हो, महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन यह सुविधा है, कानूनी बाध्यता नहीं। अगर कार्रवाई पेशेवर और नियमों के दायरे में है, तो रात में भी पुरुष पुलिसकर्मी महिला ड्राइवर को रोक सकते हैं। साल 2015 में नवी मुंबई पुलिस ने तेज और लापरवाह ड्राइविंग के खिलाफ अभियान चलाया। महिला कांस्टेबल कम थीं, इसलिए पुरुष पुलिसकर्मियों ने ही महिला ड्राइवरों के चालान काटे। तब पुलिस ने साफ कहा कि “कानून पुरुष और महिला में फर्क नहीं करता।” यहीं से यह भ्रम चकनाचूर हो गया।
महिला ड्राइवर जानें अपने अधिकार
- अधिकृत अधिकारी मांगे तो शालीनता से कागज दिखायें
- बिना जरूरत अकेले थाने बुलाया नहीं जा सकता
- रात में गिरफ्तारी के लिये महिला पुलिस की मौजूदगी जरूरी
- ई-चालान और जुर्माना नियम सब पर समान लागू
- बदसलूकी हो तो 112 या पुलिस पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें






