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कलंक का टीका : यातना… तेरा ही नाम सुनीता है

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  • 14 साल की मासूम के साथ सितम, झेला यौन शोषण, फिर पंचायत ने करा दिया बाल विवाह
  • यातनाओं को याद कर सिहर उठती है सुनीता, अभी हरे हैं शरीर और दिल पर लगे जख्म

रांची, सत्य शरण मिश्र :  कलंक का टीका : यातना..तेरा ही नाम सुनीता है…: 14 साल की एक मासूम के साथ सितम ऐसा कि दो बार छली गयी। एक बार प्रेमी ने अपने जाल में फांस कर सामाजिक अपमान का दंश दिया, यौन प्रताड़ना की, शारीरिक अत्याचार किया। दूसरी बार तब उसके सपने तार-तार हो गये, जब समाज के ठेकेदारों ने ही जबरदस्त दबाव बना कर उसका बाल विवाह करा दिया।

बाल विवाह की जिस कुरीति से पूरा देश दिन-ब-दिन उबरने की कोशिश कर रहा है, उसका जिन्न अपने ही राज्य में संवैधानिक व्यवस्था पर काबिज एक मुखिया ने बोतल से बाहर ला दिया है। अब लड़की और उसका पूरा परिवार अपने दामन पर लगे कलंक के साथ जी रहा है।

6 महीने तक हुआ यौन और शारीरिक शोषण

सुनीता (बदला हुआ नाम) खूंटी के एक गांव में अपनी रौ में जीने वाली अल्हड़ लड़की थी। गांव के खुलेपन में हमउम्र लड़कों के साथ हंसी-ठिठोली करना सामान्य बात है। लेकिन उसकी निश्छलता और भोलेपन पर पड़ोस का ही एक युवक सुभाष साहू ऐसा रीझा कि रात-दिन अपना बनाने का ख्वाब देखने लगा। सुनीता भी उम्र की ऐसी दहलीज पर थी कि सही-गलत का निर्णय नहीं कर सकती थी।

सुभाष ने उसे प्रेम का वास्ता दिया, अच्छी जिंदगी के सब्जबाग दिखाये और कमसिन बच्ची को अपने जाल में फंसाकर एक दिन अपने गांव भगा ले गया। वहां उसकी जिंदगी नर्क बन गयी। यौन शोषण और सुभाष के घरवालों के शारीरिक अत्याचार की इंतिहा हो गयी। छह महीने तक यही सिलसिला चला।

यही नहीं युवक के गांव के मुखिया की उपस्थिति में उसका विवाह भी कराया गया। बकायदा बांड पेपर पर दोनों पक्षों के माता-पिता और मुखिया के हस्ताक्षर किये गये। किसी तरह उसने अपने घरवालों को अपनी जहालत की सूचना दी, तो उसके पिता उसे वापस ले गये। सुनीता आज यातनाओं के उस दौर से बाहर निकल चुकी है, लेकिन अपने ऊपर हुए अत्याचार को याद कर वह आज भी सिहर उठती है।

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शादी का झांसा देकर उसे लेकर गांव से भगाया था

सुनीता एक गरीब घर की बेटी है। दूसरी गरीब लड़कियों की तरह उसकी भी ख्वाहिश थी कि वो अच्छे स्कूल में पढ़े, अच्छे कपड़े पहने, पास में इतने पैसे हों कि अपनी जरूरतों के सामान आसानी से खरीद सके। वो अपनी गरीबी और किस्मत को कोसते हुए घुट-घुट कर जी रही थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात सुभाष साहू से हुई। सुभाष उसी के पड़ोसी का रिश्तेदार था, जो अक्सर वहां आया-जाया करता था। सुभाष ने उससे शादी करने का वादा किया और फिर 10 फरवरी 2019 को वो चुपचाप सुनीता को लेकर गांव से भाग गया।

सुभाष सुनीता को लेकर लापुंग स्थित अपने घर पहुंच गया। अनजान लड़की के साथ बेटे को देखकर सुभाष के परिवार वाले सकते में आ गये। ग्रामीणों ने भी विरोध किया। उधर सुनीता के गायब होने की खबर मिलने के बाद उसके परिवार और गांव में हड़कंप मच गया। खोजबीन शुरू हुई तो पता चला कि पड़ोसी का रिश्तेदार उनकी बेटी को भगा ले गया है। जब उन्होंने बेटी को वापस लाना चाहा, तब समाज के ठेकेदारों ने मामले में दखल देकर सुनीता के परिजनों का मुंह बंद करवा दिया।

बॉन्ड पेपर तैयार कर कराई गई शादी

उधर सुभाष के गांव में बिना शादी के लड़की को घर में रखे जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा था। तब इसका रास्ता निकाला गया। मुखिया और गांव वालों की मौजूदगी में 13 फरवरी 2019 को नाबालिग सुनीता की शादी कराई गयी। बाकायदा एक बॉन्ड पेपर तैयार किया गया, जिसमें 14 साल की सुनीता, सुभाष, दोनों के माता-पिता और कुछ ग्रामीणों ने हस्ताक्षर किये।

इतना ही नहीं, मुखिया ने भी नाबालिग की शादी से संबंधित कागज पर अपने दस्तखत किये। इसके बाद मामला शांत हो गया। एक महीने तक सबकुछ नार्मल रहा, उसके बाद सुनीता पर यातनाओं का दौर शुरू हुआ। जिस उम्मीद से वो सुभाष के साथ भागी थी, वह उम्मीद टूट गई। घर का सारा काम उससे कराया जाने लगा। सुभाष और उसके मां-बाप अकसर उसके साथ मारपीट करने लगे। आज भी उसके बदन पर उन यातनाओं के निशान मौजूद हैं।

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सीडब्ल्यूसी के सामने हुई पेश, थाने में मामला दर्ज

सुनीता को वापस गांव लाने के बाद उसके परिजनों ने उसे सीडब्ल्यूसी के सामने पेश किया। फिर थाने में मामला दर्ज कराया गया। मामला कोर्ट में भी है। सुनीता और उसके परिजनों की गवाही हो चुकी है। आरोपी को गिरफ्तार भी किया गया। बाद में वो जमानत पर बाहर आ गया, लेकिन सुनीता और उसका परिवार आज भी न्याय की आस देख रहा है। उसके पिता ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार के पास भी यौन शोषण की शिकार अपनी बेटी को मुआवजा दिलाने की गुहार लगाई है।

सुनीता और उसका परिवार हर रोज सामाजिक अपमान का जहर पीकर जी रहा है। रिश्तेदार और ग्रामीणों के ताने उन्हें चैन से जीने नहीं दे रहे। सुनीता और उसके भाई-बहनों ने खुद को घर की चहारदीवारी में कैद कर लिया है। लोगों से आंख मिलाने की अब इनमें हिम्मत नहीं है, लेकिन क्या वो समाज गुनहगार नहीं है, जिसने जबरन एक नाबालिग लड़की का बाल विवाह करवा दिया। खाप पंचायत की तर्ज पर तुगलकी फरमान जारी करने वाले समाज के इन ठेकेदारों को क्या सजा मिलेगी?

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