Ranchi (Pawan Thakur/Bhavna Thakur) : पियूष तिवारी उर्फ प्रिंस (Prince) के मन के आंगन में शक जैसा विषैला सांप कुंडली मारकर बैठ गया था। उसे शक था कि वह जिस पड़ोसी पल्लवी (Pallavi) को बेपनाह चाहता है, अब वो उससे ज्यादा किसी और पर मरती है। उससे बातें करना तक नहीं भूलती। इस बात को लेकर पियूष और पल्लवी में कई बार तकरार हो चुकी थी। एक दफा पियूष ने पल्लवी को गरिया तक दिया। गुस्से में पल्लवी पियूष की मां को फोन कर यहां तक बोल गई कि आपने अपने बेटे को क्या यही संस्कार दिया है। पल्लवी की जुबां से निकली यही बात उसके लिये काल बन गई।
सबकुछ से अनजान पल्लवी (Pallavi) बीते 5 दिसम्बर को अपने घर से निकली। वो घर में यह बोलकर निकली कि वह अपने कॉलेज BIT हॉस्टल जा रही है। वह दिन के 11 बजे घर से निकली थी। बाहर रोड पर पियूष पहले से उसका इंतजार कर रहा था। बीते पांच साल से दोनों में प्यार था। मिलना-जुलना भी होते रहता था। दोनों एक दूसरे के बेहद करीब आ गये थे। रूठना-मनाना भी चलते रहता था। दोनों शादी तक करने का मन बना चुके थे। इन दोनों के रिश्ते से उनके घरवाले भी अनजान नहीं थे।
उस रोज दिन के उजाले में पियूष बहला-फुसला पल्लवी (Pallavi) को अपनी स्कूटी में बैठा लिया। तबतक पल्लवी अपने प्रेमी पियूष के खतरनाक इरादों से बिल्कुल अनजान थी। पल्लवी को रांची के टाटीसिल्वे थाना क्षेत्र के आरागेट के पास रेलवे किनारे ले गया। यहां दोनों में एक बार फिर से बकझक शुरू हो गई। बात इतनी बिगड़ गई कि पियूष अपनी प्रेमिका पल्लवी को मारने-पीटने लगा। तब पल्लवी ने दिन के डेढ़ बजे अपनी मां को फोन कर यह बताया कि उसे पियूष मार रहा है।
पल्लवी (Pallavi) उसके साथ बिताये पुराने लम्हें को याद दिला उसके मन में बैठे शक को मारने की कोशिश भी करती रही। वहीं अपने प्यार का वास्ता भी दिया और बोली कि ठीक है, चलो शादी कर लो। तबतक खतरनाक मन बना चुका पियूष मौके के इंतजार में था। बगल की पटरी में जन-शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन तेज रफ्तार में जा रही थी। ट्रेन जब बगल से गुजरने लगी, तब पियूष ने पल्लवी को पकड़ चलती ट्रेन में धकिया दिया। पल्लवी का सिर चलती ट्रेन में जोर से टकराया और वो पीछे फेंका औंधे मुंह नीचे गिर गई। उसका माथा फट गया। चेहरे में भी गहरी चोट लगी। उसका पूरा बदन झन्ना गया। पल्लवी थोड़ी देर तड़पती-छटपटाती रही। उसकी मुंह से आखिरी शब्द यहीं निकला, प्रिंस यह तुने क्या कर डाला। भरोसा तो करते, आखिर जीने नहीं दिया।
थोड़ी ही देर बाद पल्लवी (Pallavi) का फड़फड़ाता बदन शांत हो गया। तब प्रिंस को लगा कि उसका काम हो गया। वो वहां से भागा। सीधे बस स्टैंड आया। यहां से बस पकड़ वो बनारस चला गया। बनारस में उसने अपना पूरा हुलिया बदल लिया। उसने अपना दाढ़ी-मुंछ तक कटवा लिया। वहीं पोशाक भी बदल लिया। उसने बनारस में गंगा स्नान किया। मीडिया में खबर छप जाने के बाद वो वहां से दानापुर चला आया। यहां से आरा चला गया।
वहीं इधर, आरागेट रेलवे लाइन के किनारे मर चुकी पल्लवी की डेड बॉडी पर कुछ लोगों की नजरें गई। पल्लवी का हुलिया और पहनावा देख लोगों को लगा कि यह किसी अच्छे घर की बेटी है। मौके पर टाटीसिल्वे के थानेदार महेन्द्र कुमार करमाली भी पहुंचे। तब पल्लवी के पास से कुछ कार्ड मिले। उसका मोबाइल फोन नहीं मिला। मिले कार्ड से खुलासा हुआ कि मारी गई पल्लवी BIT मेसरा की MBA की स्टूडेंट है। उसके घरवाले को फोन किया गया। भागे-भागे उसके पिता विजय राम और अन्य नाते-रिश्तेदार मौके पर पहुंचे। थानेदार ने उन्हें हौले-हौले टटोलना शुरू किया। तब यह राज खुलकर सामने आया कि यह मर्डर केस है। कुछ देर पहले ही पल्लवी अपनी मां को फोन कर बताई थी कि उसे पियूष मार रहा है। पियूष का नाम सामने आते ही उसके जीवन कुंडली को खंगाला गया।
थानेदार महेन्द्र कुमार करमाली को पता चला कि पियूष दागी किस्म का युवक है। वह पहले भी दो बार जेल जा चुका है। एक बार आर्म्स एक्ट में भी जेल जा चुका है। पियूष के ताल्लुकात गैंगस्टर लवकुश शर्मा गिरोह से हैं। ये बातें रांची पुलिस कप्तान किशोर कौशल तक पहुंची। उन्होंने इस कांड के बेहद गंभीरता से लिया। कांके DSP नीरज कुमार की देखरेख में SIT बनी। SIT में टाटीसिल्वे के थानेदार महेन्द्र कुमार करमाली, नामकुम के थानेदार सुनील कुमार तिवारी, सब-इंस्पेक्टर रंजीत कुमार मुंडा, विद्यासागर प्रसाद, ASI बलेन्द्र कुमार, सिपाही उमेश कांत सिंह, नागेन्द्र कुमार सिंह एवं मनीष कुमार देव को रखा गया। पूरे केस की मॉनिटरिंग खुद पुलिस कप्तान किशोर कौशल कर रहे थे। फरार पियूष तिवारी उर्फ प्रिंस को आरा में बीते कल गिरफ्तार कर लिया गया। उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। इस कांड की तफ्तीश में जुटे एक पुलिस अधिकारी पल्लवी को मारने और उसकी आखिरी बोल तक के बारे में बता गये। वहीं रांची के रूरल SP क्या बोले, सुनें…
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