- 4 घंटे तक हिंसा भड़काने का ट्रंप का आखिरी दांव भी रहा फ्रुटलेस
कोहराम लाइव डेस्क : अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव वोटिंग के 64 दिन बाद जब अमेरिकी संसद बाइडेन की जीत पर मुहर लगाने जुटी तो अमेरिकी लोकतंत्र शर्मसार हो गया। ट्रंप समर्थक दंगाइयों में तब्दील हो गए। यूएस कैपिटल में तोड़फोड़ और हिंसा की गई। यूएस कैपिटल वही बिल्डिंग है, जहां अमेरिकी संसद के दोनों सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट है। कुछ वक्त तक संसद की कार्यवाही थमी रही। करीब 12 घंटे बाद दोनों सदनों ने जो बाइडेन की जीत पर आखिरकार मुहर लगा दी। ट्रंप का आखिरी दांव भी फ्रुटलेस यानी नाकाम रहा।
ट्रंप की आपत्तियां खारिज
एरिजोना और पेन्सिलवेनिया में बाइडेन की जीत के खिलाफ ट्रंप की आपत्तियां खारिज कर दी गईं। ट्रंप ने भी टकराव के तेवर छोड़ दिए। उन्होंने वादा किया कि 20 जनवरी को ‘व्यवस्थित तरीके से’ सत्ता बाइडेन को सौंप दी जाएगी।
इसे भी पढ़ें : फ्रांस में भी फैलने लगा Bird flue, 6 लाख पक्षियों को मारने का आदेश
चकनाचूर हुआ ट्रंप का घमंड
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद जिस बात का डर था, वही हुआ। हिंसा की आशंका थी और ये हुई भी। 3 नवंबर को ही यह तय हो गया था कि जो बाइडेन दुनिया के सबसे ताकतवर देश के अगले राष्ट्रपति होंगे। जिद्दी डोनाल्ड ट्रंप फिर भी हार मानने को तैयार नहीं थे। चुनाव में धांधली के आरोप लगाकर वे जनता के फैसले को नकारते रहे। हिंसा की धमकियां देते रहे। अंत में लोकतंत्र जीता। ट्रंप का घमंड चकनाचूर हो गया।
206 साल बाद अमेरिकी संसद में हुई इस प्रकार की हिंसा
यूएस कैपिटल हिस्टोरिकल सोसाइटी के डायरेक्टर सैम्युअल हॉलिडे ने बताया कि 24 अगस्त 1814 में ब्रिटेन ने अमेरिका पर हमला कर दिया था। अमेरिकी सेना की हार के बाद ब्रिटिश सैनिकों ने यूएस कैपिटल में आग लगा दी थी। तब से अब तक पिछले 206 साल में अमेरिकी संसद पर ऐसा हमला नहीं हुआ था। अब ट्रंप समर्थकों ने हिंसा कर घिनौनी हरकत का इजहार किया, जो गैर-लोकतांत्रिक है।
इसे भी पढ़ें : 100 KM प्रति घंटे की Speed से दौड़ी डबल डेकर मालगाड़ी








