Kohramlive : दिवाली की जगमगाहट के दो दिन बाद जब दीपों की लौ अब भी टिमटिमा रही होती है, तब एक और उजाला रिश्तों के आंगन में उतरता है, भाई दूज का उजाला। यह दिन बहन की ममता और भाई के विश्वास का उत्सव है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के देवता यमराज की बहन थीं यमुना। यमुना अपने भाई को बार-बार स्नेह से घर बुलाती रहीं, लेकिन यमराज अपने कर्मों के बंधन में इतने उलझे रहे कि आ नहीं सके। समय बीता और एक दिन यमराज अपनी बहन से मिलने पहुंचे। यमुना ने प्रेम से उनका स्वागत किया, घर सजाया, स्वादिष्ट व्यंजन परोसे और अपने हाथों से तिलक कर उनकी दीर्घायु की कामना की। भाई के माथे पर स्नेह का ये तिलक मानो अमर रिश्ते की मुहर बन गया। यमराज उस प्यार से इतने प्रसन्न हुये कि बोले, “मांगो बहन, जो वर चाहो।” यमुना ने वर मांगा, “हर वर्ष इसी दिन भाई अपनी बहनों के घर आयें और तिलक के साथ प्रेम का यह बंधन अमर बना रहे।” यमराज ने आशीर्वाद दिया कि जो भी बहन इस दिन अपने भाई को स्नेहपूर्वक तिलक और भोजन करायेगी, उसे यमलोक का भय नहीं रहेगा और उसके भाई की आयु लंबी होगी। तभी से भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर मिठाइयां खिलाती हैं, और भाई अपनी बहनों को उपहार देकर उनका आशीर्वाद और प्रेम स्वीकारते हैं। यह परंपरा महज एक रस्म नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच अटूट रिश्ते की जीवंत कहानी है। इस पावन दिन पर हर तिलक में एक दुआ छिपी होती है, “भैया, तेरी उम्र लंबी हो, तेरी राह में हर कदम पर खुशियां खिलें।”
अटूट स्नेह का पर्व भाई दूज, कथा में छिपा है अमर अपनापन… जानें
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