Jamtara: आखिरकार, बेवा सुलेखा को इंसाफ मिल गया। न्याय के मंदिर में गई बेवा सुलेखा को चार साल बाद इंश्योरेंस कंपनी ने 34 लाख रुपये का चेक दिया। यह चेक प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रंजीत कुमार एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय देवेश कुमार त्रिपाठी ने पीड़िता सुलेखा कुमारी दास को दिया। वहीं सुलेखा को सलाह दी कि यहीं आपका आखिरी सहारा है, जरा समझ-बुझ इसका इस्तेमाल करें। वहीं बेवा सुलेखा के मुख से बस इतना ही निकला भला हो न्याय के मंदिर में बैठे देवता रंजीत कुमार एवं देवेश कुमार त्रिपाठी का।
सुलेखा के पति काजू दास जामताड़ा पुलिस बल में तैनात थे। उस रोज वो आला अधिकारी के हुक्म पर 5 फरवरी 2018 को जामताड़ा से पटना जा रहे थे। काजू दास पटना के स्टेट बैंक से रोकड़ लाने दल-बल के साथ जा रहे थे। रास्ते में गिरिडीह के बगोदर थाना क्षेत्र के गोपालडीह गांव के पास एक गाड़ी को खड़ी देख ड्राईवर ने गाड़ी रोक दी। गाड़ी से नीचे उतरे काजू दास आगे खड़ी गाड़ी में सवार लोगों से पूछताछ करने चले गये। पता चला कि टायर पंचर है। इसी दरम्यान पीछे से आ रहे एक हाइवा ने उन्हें ठोकर मार दी। लहुलूहान कांस्टेबल बगोदर नर्सिग होम में ले जाया गया। जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इंश्योरेंस क्लेम पाने की चाह में सुलेखा कोर्ट की शरण में चली गई। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय देवेश कुमार त्रिपाठी की अदालत में मोटर दुर्घटना वाद का मामला दायर किया। गवाहों का बयान कलमबंद कराने और अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय देवेश कुमार त्रिपाठी के न्यायालय के प्रयास से पीड़िता को इंश्योरेंस कंपनी की ओर से 34 लाख रुपये का चेक दिया गया। जिसे न्यायालय ने पीड़िता सुलेखा को सुपुर्द किया। मौके पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अभिनव मौजूद थे।








