Kohramlive : रात के साये में जब पूरा देश टेलीविज़न स्क्रीन से चिपका था, तब मैदान पर एक दास्तान लिखी जा रही थी—हौसले, जुनून और बदले की। ऑस्ट्रेलिया ने चुनौती दी, लेकिन भारत के बेटों ने जवाब कुछ इस अंदाज में दिया कि पूरा स्टेडियम “इंडिया-इंडिया” के नारों से गूंज उठा। स्टीव स्मिथ की टीम ने पहले बल्लेबाजी चुनी और 264 रन की चुनौती भारत के सामने रख दी पर भारत के रणबांकुरों के लिये यह सिर्फ एक और इम्तिहान था।
शुरुआती झटकों के बाद जब मैदान पर उतरे विराट कोहली, तो उनका हर शॉट जैसे कह रहा था—”यह मेरी कहानी है, इसे मैं अपने अंदाज में लिखूंगा।” 98 गेंदों पर 84 रनों की जुझारू पारी खेली, लेकिन जब शतक से बस एक कदम दूर थे, तब जैम्पा की एक गेंद पर बड़ा शॉट लगाने के चक्कर में वे कैच दे बैठे। पर वे तब तक अपना काम कर चुके थे—भारत को जीत की राह दिखा चुके थे। फिर आये हार्दिक पांड्या, जो क्रिकेट नहीं, तूफान लेकर आये थे। 24 गेंदों में 28 रनों की उनकी विस्फोटक पारी ने भारत को जीत के मुहाने तक पहुंचा दिया। लेकिन जब जीत के लिये सिर्फ छह रन चाहिये थे, तब उन्होंने भी बड़ा शॉट लगाने के चक्कर में विकेट गंवा दिया।
केएल राहुल बने जीत के नायक
एक पल के लिये सांसें थम गईं, लेकिन केएल राहुल ने अपनी नजाकत भरी बल्लेबाजी से वो किया जो हर भारतीय देखना चाहता था—एक शानदार छक्का और भारत फ़ाइनल में! इस जीत ने न सिर्फ चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में भारत की जगह पक्की की, बल्कि 2023 के विश्व कप फ़ाइनल की हार का हिसाब भी चुकता कर दिया। अब हर आंखें फाइनल पर टिकी हैं—क्या भारत फिर से इतिहास रचेगा? जोश, जुनून और जज़्बात—यह सिर्फ एक मैच नहीं, एक इमोशन था!










