Kohramlive : जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की तो इस सृष्टि की सजाने और संवारने की जिम्मेदारी भगवान विश्वकर्मा को दी गयी। देवताओं के महलों का वास्तुकार कहे जाने वाले भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर माना जाता है। सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी के सातवें पुत्र भगवान विश्वकर्मा की पूजा आमतौर पर हर साल कन्या संक्रांति के दिन यानी 17 सितंबर को मनायी जाती है। 17 सितम्बर की सुबह 9 बजकर 44 मिनट से पूजा का शुभ मुहूर्त है। वहीं दोपहर के 12 बजकर 55 मिनट तक रहने वाला है। इस समय में सर्वार्थ सिद्धि योग रहने वाला है। इस मुहूर्त मे पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
ज्योतिषाचार्यों के हवाले से मीडिया में आई खबरों के अनुसार, सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी के द्वारा भगवान विश्वकर्मा की उत्पत्ति हुई थी। जब भगवान विष्णु को द्वारका नगरी में घर की जरूरत हुई तो भगवान विश्वकर्मा के द्वारा द्वारका नगरी में घरों का निर्माण किया गया। वहीं इस साल के विश्वकर्मा पूजा में कई शुभ योग जैसे सर्वार्थ सिद्धि योग, द्विपुष्कर योग, ब्रह्म योग और अमृत योग बन रहे हैं, इस योग में भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से व्यापार में फायदे का प्रबल योग बनता है। करीब 50 सालों बाद ऐसा शुभ योग विश्वकर्मा पूजा के दिन बन रहा है। इससे विश्वकर्मा पूजा का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है।
विश्वकर्मा पूजा की सामग्री
विश्वकर्मा पूजा करते समय पूजन सामग्री मे रोली, चन्दन, हल्दी, सुपारी, लौंग, पीला कपड़ा, मौली, मिट्टी का कलश, इलायची, जनेऊ, पानी वाला नारियल, कलश, रक्षासूत्र, इत्र, आम की लकड़ी ,फूल, कपूर, देसी घी, धूप,अक्षत, भगवान विश्वकर्मा की फोटो और लकड़ी की चौकी आदि सामग्री की जरूरत पड़ती है।
इसे भी पढ़ें : भारतीय वायु सेना को मिला पहला C-295 विमान, जानें…
इसे भी पढ़ें : मंत्री मिथिलेश ठाकुर कोर्ट में हाजिर… देखें वीडियो
इसे भी पढ़ें : घूस लेते धराये रेलवे अधिकारी करोड़पति निकले…
इसे भी पढ़ें : गणेश चतु्र्थी के दिन से नये संसद भवन में कार्यवाही की शुरूआत…
इसे भी पढ़ें : मैसिव ब्रेन हेमरेज, खर्चा बताया 18 लाख, यहां ठीक हो गये केवल 5 हजार में…. देखें वीडियो












