spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img

96 केस, 10 लाख का इनाम… फिर भी नहीं बचा सालुका

Date:

spot_img
spot_img

Chaibasa : झारखंड के नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी कामयाबी मिली है। पश्चिम सिंहभूम को पूरी तरह नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया है। कोल्हान, सारंडा और पोड़ाहाट के जंगलों में लंबे समय से सक्रिय माओवादी नेटवर्क को सुरक्षा बलों ने बड़ा झटका दिया है। मंगलवार को चाईबासा में पुलिस और CRPF के आला अधिकारियों के सामने 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमेटी सदस्य सालुका कायम समेत चार माओवादियों ने हथियार डाल दिये। चारों ने अपने हथियार और कारतूस सौंपकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।

96 मामलों वाला इनामी नक्सली भी सरेंडर

आत्मसमर्पण करने वालों में सालुका कायम उर्फ भुवनेश्वर उर्फ विक्रम सबसे बड़ा नाम है। वह माओवादी संगठन में जोनल कमेटी का सदस्य था और उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उसके खिलाफ चाईबासा में 90 और सरायकेला में 6, कुल 96 गंभीर मामले दर्ज हैं। उसके साथ कोदोमुनी कोड़ा उर्फ कोदम मुन्नी कोड़ा, पिंकी पूर्ति उर्फ सुकांती पूर्ति और अनिता तामसोय उर्फ अनिता कायम ने भी हथियार डाल दिये। कोदोमुनी के खिलाफ चाईबासा में 7, पिंकी के खिलाफ 13 और अनिता के खिलाफ चाईबासा में 12 तथा सरायकेला में एक मामला दर्ज है।

naxali movement1

AK-47 और इंसास समेत हथियार सौंपे

आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने अत्याधुनिक हथियार और बड़ी मात्रा में कारतूस सुरक्षा बलों को सौंपे। इनमें AK-47 और इंसास राइफल शामिल हैं। यह कार्रवाई ऑपरेशन नवजीवन-III के तहत हुई। इससे पहले भी इस अभियान के दो चरणों में बड़ी संख्या में माओवादी हथियार डाल चुके हैं।

naxali movement3

दो चरणों में भी टूटी नक्सलियों की कमर

ऑपरेशन नवजीवन-I के तहत 21 मई 2026 को 25 नक्सलियों ने 16 हथियार और 3,082 गोलियों के साथ आत्मसमर्पण किया था।

इसके बाद ऑपरेशन नवजीवन-II में 28 जुलाई को 14 माओवादियों ने 10 हथियार और 1,412 गोलियों के साथ हथियार डाल दिये।

अब तीसरे चरण में चार प्रमुख माओवादियों के सरेंडर ने सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता दी है।

डेढ़ साल में 49 नक्सलियों ने छोड़ा जंगल

पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 से जुलाई 2026 के बीच पश्चिम सिंहभूम में 49 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। इसी अवधि में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 22 माओवादी मारे गए, जबकि 60 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। लगातार कार्रवाई से कोल्हान और सारंडा में माओवादी संगठन का नेटवर्क तेजी से कमजोर हुआ। कोल्हान DIG अनुरंजन किस्पोट्टा के मुताबिक सरायकेला और पूर्वी सिंहभूम में अब असीम मंडल का केवल 5-6 सदस्यों वाला छोटा दस्ता सक्रिय है। DIG ने बचे हुये माओवादियों को साफ चेतावनी दी है कि हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करें और मुख्यधारा में लौटें। ऐसा नहीं करने पर सुरक्षा बल उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

कोल्हान में लाल आतंक का आखिरी अध्याय?

कभी सारंडा और पोड़ाहाट के घने जंगल माओवादियों के मजबूत गढ़ माने जाते थे। सुरक्षा बलों के लिए यहां अभियान बड़ी चुनौती रहा है। लेकिन लगातार ऑपरेशन, नये सुरक्षा कैंप, ग्रामीणों के बीच बढ़ता भरोसा और पुनर्वास नीति ने हालात बदल दिये। 10 लाख के इनामी सालुका के सरेंडर के साथ पश्चिम सिंहभूम का नक्सल मुक्त होना झारखंड के नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी उपलब्धि है।

 

इसे भी पढ़ें :

झारखंड बंद में उबाल! कहां का है क्या हाल… देखें वीडियो

Ranchi : JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और...

एक्सपर्ट बोले, अपनी भाषा, अपनी संस्कृति ही बने झारखंडी सिनेमा की पहचान…

Ranchi : झारखंड की मिट्टी में कहानियां बहुत हैं,...

झारखंड विधानसभा घेराव में शामिल हुई केंद्रीय सरना समिति…

Ranchi : झारखंड में JPSC, JSSC, CGL परीक्षाओं में...

छात्रों पर ला’ठीचार्ज के विरोध में BJP का झारखंड बंद का ऐलान…

Ranchi : झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित...

आदिवासी महोत्सवः झारखंड की मिट्टी बोलेगी, तो सिनेमा की दुनिया सुनेगी…

Ranchi : झारखंड की मिट्टी में कहानियां हैं, जंगलों...
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img

Related articles:

झारखंड बंद में उबाल! कहां का है क्या हाल… देखें वीडियो

Ranchi : JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और...

एक्सपर्ट बोले, अपनी भाषा, अपनी संस्कृति ही बने झारखंडी सिनेमा की पहचान…

Ranchi : झारखंड की मिट्टी में कहानियां बहुत हैं,...

झारखंड विधानसभा घेराव में शामिल हुई केंद्रीय सरना समिति…

Ranchi : झारखंड में JPSC, JSSC, CGL परीक्षाओं में...

छात्रों पर ला’ठीचार्ज के विरोध में BJP का झारखंड बंद का ऐलान…

Ranchi : झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित...

आदिवासी महोत्सवः झारखंड की मिट्टी बोलेगी, तो सिनेमा की दुनिया सुनेगी…

Ranchi : झारखंड की मिट्टी में कहानियां हैं, जंगलों...