Ranchi : रांची की हवाओं में एक नया बदलाव तैर रहा था, जब आंगनबाड़ी सेविकाओं के हाथों में सरकार ने स्मार्टफोन सौंपे। यह सिर्फ एक तकनीकी यंत्र नहीं था, बल्कि उनके संघर्ष और मेहनत को सम्मान देने का एक प्रतीक था। CM हेमंत सोरेन ने जब मंच से कहा, “यह मोबाइल नहीं, आपका हमेशा साथ निभाने वाला सहयोगी है,” तो हर सेविका की आंखों में एक नई चमक आ गई। अब तक वे अपने निजी फोन से काम करती थीं, लेकिन अब उनके हाथों में एक ऐसी शक्ति थी, जो उनके हर प्रयास को सहज और सशक्त बनायेगी। परंतु हर शक्ति के साथ एक जिम्मेदारी भी होती है। CM ने सचेत किया कि “यह वही अलाउद्दीन का चिराग है, जो आपके शब्दों और विचारों का प्रतिबिंब बनेगा। अच्छा कहोगे, तो अच्छा करेगा, बुरा कहोगे, तो बुरा करेगा।” मौका था CM हेमंत सोरेन के हाथों आंगनबाड़ी सेविकाओं और महिला पर्यवेक्षिकाओं के बीच स्मार्टफोन वितरण समारोह का। यह कार्यक्रम मंत्रालय में हुआ।
रांची की संध्या रानी हो या तोरपा की रंजीता देवी, दोनों की आवाज़ में संतोष था— “अब हमें अपने घर के मोबाइल पर निर्भर नहीं रहना होगा। सरकार ने हमें हमारे कर्तव्य को और सुगम बनाने के लिये एक उपहार दिया है।” यह सिर्फ एक फोन नहीं, बल्कि उन महिलाओं के हाथों में एक नई शक्ति थी, जो नन्हें बच्चों के भविष्य को संवारने में जुटी हैं। गांव-गांव, गली-गली, यह स्मार्टफोन उनके समर्पण की एक नई कहानी लिखेगा, डिजिटल क्रांति और मातृ-शक्ति का अद्भुत संगम।झारखंड मंत्रालय में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हाथों रांची के 100 और खूंटी के 50 आंगनबाड़ी सेविका और महिला पर्यवेक्षिका को स्मार्टफोन सौंपा गया। अब तक यह आंगनबाड़ी सेविका और महिला पर्यवेक्षिका अपने घर के मोबाइल से रिपोर्ट तैयार करने का काम करती थी। इसके एवज में इंटरनेट खर्च के लिए विभाग के द्वारा प्रतिमाह 200 रुपये यानी साल के 2400 दिए जाते थे।
सरकार के द्वारा मिले इस स्मार्टफोन में सिम कार्ड पूर्व में रजिस्टर्ड मोबाइल सिम कार्ड को ही इसमें डालकर चालू करना होगा। खूंटी के तोरपा की आंगनबाड़ी सेविका रंजीता देवी कहती है कि सरकार के द्वारा स्मार्टफोन मिलने के बाद कामकाज में सहूलियत मिलेगी। अभी तक हम लोग अपने घर के मोबाइल से काम का चलाते थे। रांची के आंगनबाड़ी सेविका संध्या रानी कहती हैं कि सरकार की ओर से मिले इस मोबाइल को सरकारी काम में उपयोग करेंगे ना की अपने व्यक्तिगत कामों के लिए इसका इस्तेमाल करेंगे।





