एक मनहूस गाना, जिसने मौ’त को एक ही धुन में पिरो दिया…

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Kohramlive : कभी-कभी जिंदगी ऐसी धुन छेड़ देती है, जो दिल को सिर्फ छूती नहीं, भीतर कहीं गहरे तक काट देती है। फिल्मों में गाने अक्सर कहानी में रंग भरते हैं, कभी मुस्कान बनते हैं, कभी आंसू, कभी यादों का सैलाब। लेकिन
दुनिया का सबसे मनहूस गाना कहलाया “Gloomy Sunday” यही सवाल दुनिया के सामने छोड़ गया। साल 1933 में रेज़्सो सेरेस और लैजलो ने यह गीत लिखा। 1935 में रिलीज होते ही दुनिया को जैसे एक अजीब-सी उदासी ने जकड़ लिया। उस साल, एक युवक ने गाने को सुनने के तुरंत बाद अपनी जान ले ली और अपने सुसाइड नोट में सिर्फ दो शब्द लिखे “Gloomy Sunday”। दर्द यहीं नहीं थमा, खुद कंपोजर की मंगेतर ने जहर खाकर दुनिया को अलविदा कह दिया। कहते हैं, यह धुन दिल टूटने का ऐसा बयान थी कि लोग अपने पुराने घावों में फिर से डूबने लगे, वही जख्म, जो वक्त ने कभी न भरे हों।

नेसा… एक दर्द जो नींदों में भी चीखता है

इसी गाने के जख्मों जैसी कहानी है नेसा की। डर, मजबूरी और अनजानी गलतियों के बीच उसने फार्मेसी से बिना पर्ची दवा ले ली, मलेरिया की दवा, जो गर्भ के लिये जहर थी। कुछ ही देर में वह बेहोश होकर गिर पड़ी। डॉक्टरों ने जान तो बचा ली, लेकिन डर, आज भी उसके सीने में धड़कता है। दुनिया “Gloomy Sunday” से जितना मोहित हुई, उतना ही उससे डरने लगी। 1941 में इसे बैन कर दिया गया, मानो समाज ने खुद को बचाने की कोशिश की। 2003 में पाबंदी हटी, पर तब तक यह गाना एक किवदंती बन चुका था, उदासी की, दर्द की, मौत की। और सबसे दर्दनाक अध्याय, 1968 में खुद रेज्सो सेरेस ने भी आत्महत्या कर ली। जिसने धुन बनाई, वही उससे सबसे गहरा घायल हो गया।

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