Kohramlive : कभी दादा–दादी की बीमारी समझा जाने वाला हाई ब्लड प्रेशर अब बच्चों के मासूम कंधों पर भी बोझ बनकर चढ़ने लगा है। भारत में हर 5 में से 1 व्यक्ति इसकी गिरफ्त में है और हैरानी की बात यह कि अब बच्चे भी इससे अछूते नहीं। जैसे कोई खामोश तूफ़ान, जो बाहर से शांत दिखता है, पर भीतर से शरीर को झकझोर देता है। अधिकतर बच्चों में शुरुआत में लक्षण नहीं दिखते, मगर जब शरीर थकान से झुकने लगे, तो संकेत समझ लेना चाहिये, जैसे..लगातार सिरदर्द, जल्दी थक जाना, धुंधला दिखाई देना, दिल की धड़कन तेज होना, सीने में हल्का दर्द, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक पसीना, मतली और उल्टी, ये छोटे-छोटे लक्षण किसी बड़ी कहानी की शुरुआत हो सकते हैं।
प्राइमरी हाइपरटेंशन (लाइफस्टाइल से जुड़ा हुआ)
परिवार में हाई BP का इतिहास, मोटापा और बढ़ता जंक फूड, घंटों टीवी और मोबाइल की चिपकन, पढ़ाई और अपेक्षाओं का तनाव, नींद की कमी, फल–सब्जियों का कम सेवन, मीठे-पेय और फास्ट फूड की लत।
सेकेंडरी हाइपरटेंशन (बीमारियों के कारण)
किडनी से जुड़ी समस्यायें, हार्मोनल गड़बड़ी, स्लीप एपनिया, हृदय रोग, कुछ दवाओं का असर।
बच्चों को बचाने की ढाल
- 4–8 साल: नमक 1200 mg तक
- बड़े बच्चे: 1500 mg तक
फास्ट फूड, मीठे पेय और तले स्नैक्स पर सख्ती से रोक। कम से कम 1 घंटे की फिजिकल एक्टिविटी जरूरी।
स्क्रीन टाइम कम करें
मोबाइल की रोशनी बच्चों की नींद भी चुरा लेती है और स्वास्थ्य भी। नींद की कमी बच्चों का BP बढ़ाने वाला छुपा हुआ कारण है। जैसे हम होमवर्क देखते हैं, वैसे ही अपने बच्चे का हेल्थ रिपोर्ट कार्ड भी देखें। विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि
बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर को नजरअंदाज करना भविष्य में दिल, किडनी और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।






