Ranchi : गांवों की गलियों में अब सिर्फ धूल नहीं, उम्मीदें भी उड़ रही हैं। मंगलवार को दिल्ली में हुई एक अहम बैठक में झारखंड की ग्रामीण तस्वीर बदलने की रूपरेखा बनी। बैठक में झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, भारत सरकार के ग्रामीण विकास सचिव शैलेश कुमार सिंह और झारखंड सरकार के सचिव के. श्रीनिवासन मौजूद रहे। दीपिका पांडेय सिंह का स्वर दृढ़ था, लेकिन लहजा गांव की सोंधी मिट्टी जैसा झारखंड के हर कोने तक योजनाओं को पहुंचना है। ये सिर्फ विकास नहीं, समावेशी समृद्धि का सपना है।” इस उच्चस्तरीय बैठक में चार महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी
- लंबित राशि का शीघ्र भुगतान, जिससे रुकी हुई योजनाओं को फिर से गति मिल सके।
- योजनाओं का आसान और तेज़ क्रियान्वयन ताकि लाभ सीधे गांव- गांव तक पहुंचे।
- रोज़गार पर विशेष ध्यान ताकि गांवों में ही आजीविका की स्थायी राह बने।
- राज्य-केंद्र के बीच मजबूत तालमेल जिससे नीतियों में न केवल सहमति हो, बल्कि जमीनी असर भी दिखे।
बैठक के बाद साफ था, झारखंड सरकार गांवों को सिर्फ बसाना नहीं, अब उन्हें सशक्त बनाना चाहती है। जहां गांव के लोग सिर्फ लाभार्थी नहीं, विकास के भागीदार बनें।








